चमड़ा, कपड़ा और सिंथेटिक के जूते-चप्पलों के बीच तकनीक ने इस उद्यम के लिए नए विकल्प भी तलाशे हैं। पेड़-पाैधों की छाल के साथ ही गन्ने और कैक्टस से भी फुटवियर बन रहे हैं, जो पैरों के लिए आरामदायक होने के साथ ही बेहद टिकाऊ भी हैं। आगरा मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर (एफमेक) के सींगना स्थित आगरा ट्रेड सेंटर में चल रहे मीट एट आगरा में लगे स्टॉलों पर जूता उद्योग को इको फ्रेंडली बनाने वाले उत्पाद उद्यमियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
अहमदाबाद से आए आनंद अग्रवाल ने बताया कि गन्ने की खोई और कैक्टस से जूता, चप्पल, बैग, पर्स, सोफा, गारमेंट समेत कई तरह के उत्पाद बन रहे हैं। ये चमड़े से सस्ते और सिंथेटिक से महंगे हैं। इसे प्लांटिंग वीगन लेदर कहते हैं। स्टाइलिश होने के साथ इसके उत्पाद बेहद टिकाऊ भी हैं। इसके बने जूते-चप्पल समेत अन्य उत्पाद 7 से 10 साल तक चलते हैं। कई देशों में इसके उत्पादों का निर्यात हो रहा है।
उन्होंने बताया कि प्लांटिंग वीगन लेदर को प्लांट में तैयार करते हैं और खुद ही मेक्सिको प्रजाति के कैक्टस की 10 एकड़ में खेती भी करते हैं। कैक्टस की इस प्रजाति में कांटे नहीं होते हैं। किसानों को भी इसका ब्रीड देकर पैदावार कर प्रति पत्ता पांच रुपये में खरीदते हैं। किसानों से गन्ने की खोई लेते हैं। प्लांटिंग वीगन लेदर निर्माण के लिए प्लांट भी लगाए हैं। इससे किसानों की आय भी बढ़ रही है।
मीट एट आगरा में जूता, सोल, मशीनरी समेत 253 स्टॉल लगे हैं। मीट के दूसरे दिन 6922 विजिटर आए। देश-विदेश के 3,140 उद्यमियों ने स्टॉलों का निरीक्षण कर उत्पादों की बुकिंग भी कराई है। इसमें नॉन लेदर प्रोडक्ट के स्टॉल अधिक हैं। उद्यमियों का मानना है कि नॉन लेदर जूते, चप्पल, बैग, शीट कवर, सजावटी सामान समेत कई तरह के उत्पाद बनाए जा रहे हैं। दुनिया में इन उत्पादों की मांग में तेजी आने से कई देशों में निर्यात भी बढ़ा है।
