
लिवर में होने वाली दिक्कतें।
– फोटो : istock
विस्तार
बचपन में हाथ, पैर, कमर के जोड़ में दर्द है या बार बार पीलिया हो रहा है। मूत्राशय में रुकावट और लिवर में बार बार सूजन आ रही है तो यह सिकल सेल एनीमिया के लक्षण हैं। बुधवार को आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के बायोकेमिस्ट्री विभाग में इसके प्रति जागरुकता कार्यक्रम किया गया।
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि भारत में यह जनजातीय समुदाय और ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे आम है। इस स्थिति में रेड ब्लड सेल्स कठोर, सिकल आकार ग्रहण कर लेती हैं, जो रक्त प्रवाह को रोकने लगती हैं। ऊतकों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति को कम करती हैं। यदि इस बीमारी का समय पर पहचान और उपचार नहीं किया जाता है, तो रोगी की मृत्यु भी हो सकती है।
इसकी जांच के लिए सिकल सोल्युबिलिटी टेस्ट, हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस और कई आनुवंशिक परीक्षण किए जाते हैं। बायोकेमिस्ट्री विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कामना सिंह ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में सिकल सेल एनीमिया का प्रबंधन दर्द से राहत, हाइड्रेशन, हाइड्रोक्सीयूरिया जैसी दवाओं से किया जाता है।
दीक्षा को मिला पहला पुरस्कार
बायोकेमिस्ट्री विभाग़ में सिकल सेल एनीमिया पर पोस्टर प्रतियोगिता में पैरामेडिकल संवर्ग के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। इसमें दीक्षा कटियार को पहला पुरस्कार, शिवानी गोस्वामी एवं शिवांगी को दूसरा और आकांक्षा गोयल को तीसरा पुरस्कार दिया गया। चतुर्थ पुरस्कार सत्यम उत्तम, सत्यम गुप्ता को मिला। प्रतियोगिता के जज डॉ टी पी. सिंह, डॉ कामना सिंह डॉ गजेंद्र विक्रम सिंह, डॉ बृजेश शर्मा, डॉ प्रीति भारद्वाज, डॉ गीतू सिंह, डॉ के एस दिनकर रहे।
