विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में नोटिस की सुनवाई के लिए 27 मार्च तक मियाद है। लेकिन, अपर सहायक एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के कार्यशैली कछुआ चाल जैसी है। 7 जनवरी से नोटिस प्रक्रिया शुरू हुई थी। पिछले 38 दिन में 96 हजार मतदाताओं की सुनवाई हो सकी है। जबकि 7.64 लाख मतदाताओं को नोटिस मिलेंगे। इनमें 3.25 लाख मतदाता वह हैं जिनका 2003 की सूची में रिश्तेदारों से विवरण मेल नहीं खा रहा और 4.38 लाख ऐसे मतदाता हैं जिन्होंने गणना फाॅर्म ही गलत भरे।

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इस तरह 7.64 लाख मतदाताओं का वोट नोटिस और कागजी साक्ष्यों पर निर्भर हो गया है। पिछले 38 दिन में 7.64 लाख में 96 हजार मतदाताओं की सुनवाई शनिवार तक हो सकी है। यानी रोज औसतन 2526 लोगों की सुनवाई हो रही है। इसी रफ्तार से चले तो अगले 48 दिन में महज 1.18 लाख की सुनवाई हो सकेगी। इस तरह 6.40 लाख मतदाताओं का वोट संकट में आ सकता है।

 



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