CM Yogi Adityanath in Naimisharanya Sitapur.

मुख्यमंत्री योगी ने संतों से भी चर्चा की।
– फोटो : amar ujala

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज मेरा यह सौभाग्य है कि जिस तीर्थ की महिमा का रामचरित मानस जैसे पौराणिक ग्रन्थ में उल्लेख है। वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभियान ‘स्वच्छता ही सेवा’ के माध्यम से स्वच्छांजलि देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। ऋषि मुनियों ने आध्यात्मिक साधना से जो धरोहर दी। इस पौराणिक तीर्थ में चक्रतीर्थ व मां ललिता देवी के दर्शन किए। यह महर्षि दधीचि के त्याग व बलिदान की धरती है।

88 हजार ऋषियों को 18 पुराणों की कथा सुनाकर भारत की वेदों की परंपरा को आगे बढ़ाया गया था। यहां पर जहां-तहां बिखरे तीर्थ पौराणिक महत्व के प्रतीक हैं। उपेक्षा के कारण यहां का विकास ही नहीं हुआ। आज डबल इंजन की सरकार नैमिष तीर्थ के विकास को एक अभियान के रूप में आगे बढ़ा रही है। मैं इस अवसर पर इस तीर्थ को नमन करता हूं। आज नैमिष तीर्थ चमक रहा है। हमें इसे साफ करना चाहिए। हम सबकी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को नैमिषारण्य में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने जिले को 550 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात दी।

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मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जबसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान को जनांदोलन बनाया है तबसे मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू और कालाजार सभी बीमारियां समाप्ति की ओर जा रही हैं। वहीं, हर गरीब के लिए 5 लाख का स्वास्थ्य बीमा का कवर एक वरदान है। सीतापुर में पीएम आवास योजना के तहत 2,34,800 से अधिक परिवारों को आवास मिला। आजादी के पहले दशक में मकान मिलना चाहिए था लेकिन तब नहीं दिया। गरीब कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लाभार्थियों को बिना भेदभाव के दिया जा रहा है। कुछ ही दिनों के बाद नैमिषारण्य को हेलीकॉप्टर की योजना से भी जोड़ने जा रहें हैं।

लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करेगी सरकार, कोई नहीं उजड़ेगा

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि डबल इंजन की सरकार लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करेगी। कोई नहीं उजड़ेगा। पहले की तुलना में सबकी आमदनी कई गुना बढ़ जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें तीर्थ की स्वच्छता पर ध्यान देना होगा। गोमती मां गंगा से भी प्राचीन नदी है। गोमती को साफ रखना हमारा दायित्व होना चाहिए। तीर्थ को स्वच्छ बनाये रखें। कहीं गंदगी न हो इसका ध्यान रखें। हमें प्लास्टिक मुक्त भारत की ओर जाना होगा। प्लास्टिक की वैकल्पिक व्यवस्था का प्रयोग करें।



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