Sitapur massacre: The story of police being drunk and Anurag being mentally deranged turned out to be false

सीतापुर मर्डर केस।
– फोटो : अमर उजाला

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सीतापुर जिले का पल्हापुर हत्याकांड। शनिवार तड़के तीन मासूम बच्चों, पति-पत्नी और मां सहित छह लाशें। सभी खून से सनी। गोली मारी गई। चेहरे पर भी वार किया गया। लेकिन सीतापुर पुलिस ने गुडवर्क के चक्कर में मृतक अनुराग को ही हत्यारोपी बना दिया। मां की हत्या के आरोप मढ़े, पत्नी और तीन मासूम बच्चों की हत्या का कलंक भी लगा दिया। दिल दहलाने वाले हत्याकांड में तथ्यात्मक जांच की भी जहमत नहीं उठाई गई और प्राथमिक साक्ष्यों को नजरअंदाज कर हत्याकांड को पारिवारिक विवाद करार दे वाहवाही लूट ली गई। थिअरी को सही साबित करने के लिए एसपी चक्रेश मिश्र ने तो अनुरोग को शराबी और नशे का लती बताते हुए मानसिक रूप से विक्षिप्त भी करार दे दिया, लेकिन रविवार शाम को सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस की थिअरी को नकारते हुए बता दिया कि अनुरोग सहित पूरे परिवार की नृशंस हत्या हुई थी।

पहला झूठ : शराबी था अनुराग

अनुराग सिंह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहीं भी शराब का जिक्र नहीं है। जिला अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डा. अनुपम मिश्रा के हस्ताक्षर से जारी रिपोर्ट में बड़ी व छोटी आंत खाली बताई गई है। पेट में खाना और करीब 100 एमएल पानी मिला है, लेकिन कहीं भी शराब का जिक्र नहीं है। ऐसे में सवाल साफ है कि अगर अनुराग शराब का लती था तो रोजाना उसका सेवन करता होगा, लेकिन घटना वाले दिन उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया। इससे पुलिस का पहला झूठ पीएम रिपोर्ट से ही बेनकाब हो गया।

दूसरा झूठ : मानसिक रूप से विक्षिप्त

गांव के अनुपम सिंह कहते हैं अनुराग प्रगतिशील किसान था। सभी आधुनिक कृषि उपकरण उसके पास थे और कृषि विभाग की गोष्ठियों में वह किसानों को आधुनिक खेती का प्रशिक्षण भी देता था। अब ऐसे में देखना होगा कि पुलिस जिसे मानसिक रूप से विक्षिप्त बता रही थी असल में वह तो होनहार था।

यह हुई थी घटना

पल्हापुर गांव निवासी अनुराग सिंह (45), उसकी पत्नी प्रियंका सिंह (40), मां सावित्री (62) की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। वहीं प्रियंका के तीन बच्चों अस्वी (12), अर्ना (8) व पुत्र आद्विक (4) को छत से फेंका गया था। पुलिस के पहुंचने पर अनुराग के बड़े भाई अजीत ने बताया था कि नशे की लत की वजह से भाई अनुराग ने मां सावित्री के साथ अपनी पत्नी प्रियंका व तीन बच्चों की हत्या कर दी। इसके बाद गोली मारकर खुद आत्महत्या कर ली। उसे भी मारने का प्रयास किया लेकिन उसने कमरा बंद कर खुद की जान बचा ली। हड़बड़ाहट में पुलिस भी शुरुआत में इन हत्याओं के लिए अनुराग को ही जिम्मेदार ठहरा रही थी। लखनऊ से डीजीपी प्रशांत कुमार के हस्तक्षेप के बाद आईजी तरुण गाबा खुद जांच करने पहुंचे। रविवार को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी पुलिस की पूरी थ्योरी पलट दी। अनुराग के सिर में दो गाेलियां मारे जाने की पुष्टि होने पर पुलिस ने अनुराग के ताऊ आरपी सिंह, अजीत और उसकी पत्नी के साथ दो नौकरों समेत कई अन्य को हिरासत में लिया था।



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