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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। गुड सेमेरिटन (नेक इंसान) योजना प्रचार-प्रसार के अभाव में दम तोड़ रही है। हालात यह है कि नौ वर्षों में केवल छह ही नेक इंसान मिल सके, लेकिन उन्हें भी अब तक इनाम नहीं मिल सका। अधिकारियों का कहना है कि चयनित कर नाम मुख्यालय भेजे गए हैं। स्वीकृति मिलने पर इनाम दिया जाएगा।
वर्ष 2014 से शुरू हुई योजना : सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में कमी लाने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2017 में गुड सेमेरिटन योजना शुरू की थी। दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को गुड सेमेरिटन कहा जाता है। इस योजना के तहत नेक इंसान को पांच हजार रुपये और प्रमाणपत्र दिया जाएगा। लेकिन, योजना शुरू होने के नौ वर्ष बाद 15 लाख की आबादी में महज छह ही नेक इंसान चिह्नित किए गए हैं। हैरानी की बात यह कि अब तक उन्हें इनाम भी नहीं मिल सका।
पूछताछ के भय से आगे नहीं आते लोग : दुर्घटना में घायल की मदद करने के बाद अस्पताल में नाम दर्ज होने पर कई बार पूछताछ का भय बना रहता है। यही कारण है कि लोग दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद तो करते हैं, लेकिन पुलिस के पचड़े से बचने के लिए योजना के तहत आवेदन नहीं करते। यही कारण है कि अब तक नेक इंसान की संख्या में वृद्धि नहीं हो पा रही है।
खाते में आती है इनाम की राशि : दुर्घटना में घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाने के बाद इसकी सूचना पुलिस को देनी होगी। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित मूल्यांकन समिति पुरस्कार देने का निर्णय करती है। पुलिस अधीक्षक, सीएमओ व एआरटीओ (प्रवर्तन) मूल्यांकन समिति के सदस्य हैं। नेक इंसान में चयनित व्यक्ति का नाम परिवहन आयुक्त को भेजा जाता है। इसके बाद पुरस्कार राशि नेक इंसान के खाते में सीधे भेज दी जाती है।
अब तक छह नेक इंसान चयनित किए गए हैं, जिनके नाम को मुख्यालय भेज दिया है। स्वीकृति मिलने पर इनाम की राशि खाते में आ जाएगी।
– मोहम्मद कय्यूम खान, एआरटीओ
