लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में सोमवार को नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री प्रो. अभिजीत बनर्जी का विशेष व्याख्यान हुआ। यह व्याख्यान उनकी चर्चित पुस्तक- पूअर इकोनोमिक्स के दूसरे संस्करण पर केंद्रित रहा। प्रो. बनर्जी ने कहा कि भूख और वैश्विक गरीबी जैसी जटिल समस्याओं के समाधान के लिए प्रयोग आधारित सोच बेहद जरूरी है। गरीबी को समझने और उससे प्रभावी ढंग से निपटने में पोषण, शिक्षा, माइक्रोक्रेडिट और छोटे-छोटे प्रयासों की अहम भूमिका होती है। नीतियां तभी कारगर बनती हैं, जब उनका जमीनी स्तर पर सही ढंग से क्रियान्वयन हो।
उन्होंने 147 देशों में किए गए अपने शोध का हवाला देते हुए बताया कि केवल आय बढ़ाने से समस्याएं स्वतः समाप्त नहीं होतीं। लोगों के व्यवहार, निर्णय प्रक्रिया और प्राथमिकताओं में सकारात्मक बदलाव कई बार ज्यादा प्रभावी साबित होते हैं।
उन्होंने एनजीओ ‘प्रथम’ के साथ संचालित टीचिंग एट द राइट लेवल कार्यक्रम का उल्लेख किया। अत्यधिक भारी पाठ्यक्रम बच्चों की प्रतिभा को दबा देते हैं, इसलिए शिक्षा को सरल, व्यावहारिक और सीखने योग्य बनाना जरूरी है। माइक्रोफाइनेंस पर कहा कि यह कोई जादुई समाधान नहीं है, क्योंकि इसके लाभ सीमित वर्ग तक ही पहुंच पाते हैं। सामाजिक नीतियों में बड़े ढांचों पर निर्भर रहने के बजाय जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की बारीकियों पर ध्यान देना प्रभावी होता है।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. अरविंद मोहन के स्वागत भाषण से हुई। अध्यक्षीय संबोधन कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने किया। कार्यक्रम में पूर्व मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश आलोक रंजन, मनोज कुमार सिंह, प्रदीप भटनागर, अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी, अमित घोष, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी, रोहित नंदन और लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति जी.बी. पटनायक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद् व शोधार्थी उपस्थित रहे।
रवींद्रनाथ टैगोर के बाद प्रो. अभिजीत बनर्जी लखनऊ विश्वविद्यालय आने वाले दूसरे नोबेल अवार्डी हैं। प्रो. अभिजीत भारतीय-अमेरिकी विकास अर्थशास्त्री और एमआईटी में प्रोफेसर हैं, जिन्हें वैश्विक गरीबी कम करने के प्रयोगात्मक दृष्टिकोण के लिए पत्नी एस्थर डुफ्लो के साथ वर्ष 2019 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला। ये दोनों दुनिया के छठवें ऐसे कपल हैं जिन्हें एक साथ नोबेल पुरस्कार मिल चुका है।

नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री प्रो. अभिजीत बनर्जी का विशेष व्याख्यान हुआ।
