
मृतक विनीत
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लता मंगेशकर, कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स और मैरी कॉम। इनकी कहानियां विनीत को किसी ने सुनाई होतीं तो वह पटरी पर गर्दन न रखता। छोटे परिवार में ही खुशहाली बसती है, यह भी उसे किसी ने नहीं बताया होगा। बेटा की तारेगा, इस रूढि़ ने उसे जकड़ लिया और बेटियां उसे बोझ लगनी लगीं। अब जरा सोचिए यह पांचवीं बेटी जब बड़ी होगी तो अपने पिता को किस तरह याद करेगी?
बहेटा गांव निवासी विनीत बेटे की चाहत में जगह-जगह भटकता रहा। हर मन्नत मांगी। जिसने जो बता दिया वह किया भी। पत्नी मालती से भी कहता था कि उसे तो बेटा ही चाहिए लेकिन वह यह नहीं समझ सका कि बेटा और बेटी भला किसी के हाथ में होता है। परिवार वालों का कहना है कि जब पहली बेटी रीनू हुई तो विनीत बहुत खुश था। घर में पूजा कराई।
परिवार के लोगों को जोड़कर नामकरण संस्कार कराया। वह सबसे कहता था कि दूसरा बेटा होगा तो परिवार कंप्लीट हो जाएगा। लेकिन उसके दूसरी बेटी रीनू हो गई। एक-एक करके पांच बेटियों का पिता बन गया विनीत। घर वालों का कहना है कि पांचवीं बेटी होने के बाद वह तनाव में रहने लगा था। लेकिन उसे यह समझाने वाला कोई नहीं था कि बेटियां बोझ नहीं हैं। आज बेटियां हर क्षेत्र में नाम कमा रही हैं। अगर शुरूआत में ही किसी ने बता दिया होता कि छोटा परिवार खुशहाल होता है तो शायद बेटे की चाहत में उसके पांच बेटियां न होतीं।
