
आरोपी सचिन व शिवानंद।
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एसटीएफ ने मेडिकल स्टोर का फर्जी लाइसेंस दिलाकर मोटी रकम वसूलने वाले गिरोह का राजफाश कर दो शातिरों को गिरफ्तार किया। गाजीपुर थाने में आरोपियों के खिलाफ एसटीएफ ने एफआईआर दर्ज कराई है। गिरोह का सरगना बरेली का रहने वाला है। एसटीएफ अब उसकी तलाश में लगी है।एसटीएफ डीएसपी अवनीश्वर चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि लेखराज मार्केट के पास से देवरिया निवासी सचिन मणि त्रिपाठी व भीखापुरवा कुर्सी रोड के रहने वाले शिवानंद वर्मा को गिरफ्तार किया गया है।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वह लोगों के फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज तैयार करते हैं। खासकर बी-फार्मा व डी-फार्मा के। इन दस्तावेजों के आधार पर संबंधित शख्स को उप्र फार्मेसी काउंसिल से मेडिकल स्टोर का लाइसेंस दिलवाते हैं। इसके लिए वह पांच लाख रुपये तक वसूलते हैं। आरोपियों के पास से 192 फर्जी अंकपत्र, सर्टिफिकेट व डिप्लोमा बरामद हुए। इसके अलावा दो लैपटॉप, दो अपॉइंटमेंट लेटर, चार पैन कार्ड समेत तमाम लोगों के शैक्षणिक दस्तावेज बरामद हुए। आरोपियों की एसयूवी भी सीज की गई है।
चार लाख रुपये लेता है सरगना
आरोपियों ने बताया कि बरेली निवासी हरिशंकर नाम का शख्स गिरोह का सरगना है। सचिन और शिवानंद का मुख्य काम ऐसे लोगों को जाल में फंसाकर लाना होता था जो मेडिकल स्टोर का लाइसेंस लेना चाहते हों। पूरी डील के बाद वह हरिशंकर को सभी दस्तावेज व ब्योरा भेजते थे। हरिशंकर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज बनाकर इन दोनों को देते थे। आखिर में इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लाइसेंस के लिए आवेदन किया जाता था। फार्मेसी काउंसिल से लाइसेंस तय समय में जारी कर दिया जाता था। एक लाइसेंस बनवाने का पांच लाख रुपये आरोपी वसूलते थे। उनमें से चार लाख रुपये हरिशंकर ले लेता था।
काउंसिल के कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहा खेल, कई रडार पर
एसटीएफ की तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि फार्मेसी काउंसिल के कुछ कर्मचारी गिरोह से मिले हुए हैं। जिनकी मदद से गिरोह लाइसेंस दिलवाता है। काउंसिल की तरफ से आवेदक के दस्तावेजों के सत्यापन में खेल किया जा रहा है। तीन से चार कर्मचारियों के बारे में जानकारी मिली है। एसटीएफ उनकी भूमिका की जांच और गहनता से कर रही है।
देश-विदेश में एमबीबीएस में दाखिले के नाम पर भी ठगी
आरोपी सचिन व शिवानंद दोनों एमबीए पास हैं। एसटीएफ के मुताबिक मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को भी आरोपी अपने जाल में फंसाते थे। देश से लेकर विदेश में एमबीबीएस में दाखिला कराने का झांसा देकर उनसे ठगी करते थे। इसके पुख्ता सुबूत एसटीएफ को मिले हैं।
