STF caught the supplier who was bringing fake medicines from Himachal and Haryana Inquiry continues

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– फोटो : सोशल मीडिया

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हिमाचल और हरियाणा से आगरा में नकली एंटीबायोटिक दवाओं की खेप पहुंच रही है। इन्हें बाजार में नकली बिल देकर खपाया जाता है। एसटीएफ ने मंगलवार रात संजय प्लेस से एटा के सप्लायर अनुराग काैशल को गिरफ्तार किया। उससे 5.67 लाख रुपये कीमत की नकली दवाएं बरामद कीं। उसने पूछताछ में अलीगढ़, शिमला, सोनीपत और करनाल के विक्रेताओं के नाम बताए हैं। तलाश में टीमें लगाई गई हैं। मामले में थाना हरीपर्वत में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेजा गया।

एसटीएफ आगरा यूनिट के इंस्पेक्टर हुकुम सिंह ने बताया कि आगरा में नकली दवाओं की बिक्री की सूचना मिल रही थी। टीम पड़ताल में लगी थी। 5 अक्तूबर को रोहित बलेचा के मस्ता की बगीची, विजय नगर काॅलोनी स्थित गणेशाय इंटरप्राइजेज फर्म पर औषधि विभाग की टीम ने छापा मारा था। 6 दवाओं के सैंपल लिए गए थे, जो राजकीय विश्लेषक, लखनऊ की रिपोर्ट में 18 अक्तूबर को नकली घोषित हुए। इस मामले में दुकान संचालक को पकड़ा गया। उसके खिलाफ कोर्ट में वाद दर्ज कराया गया। उससे पूछताछ में पता चला कि एटा के अलीगंज का अनुराग काैशल उन्हें दवा बेचकर जाता है। वह बिल भी देता है। टीम अनुराग की तलाश में जुट गई। मंगलवार रात को उसे संजय प्लेस स्थित एलआईसी बिल्डिंग के पास से गिरफ्तार कर लिया। उससे 5.67 लाख की नकली दवा, मोबाइल और 8000 रुपये बरामद किए गए।

पूछताछ में पता चला कि उसके पिता का अलीगंज में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र है। यह वो वर्ष 2018 से चला रहा था। इसका लाइसेंस अप्रैल 2023 में समाप्त हो गया था। मगर, उसने काम बंद नहीं किया। दुकान की आड़ में वह तीन साल से नकली दवाओं की सप्लाई कर रहा था। मामले में उसके खिलाफ थाना हरीपर्वत में औषधि तथा प्रसाधन सामग्री अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता में मुकदमा दर्ज किया गया है।

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दीपक अमोली की शिमला में दवा फैक्टरी

एसटीएफ की पूछताछ में आरोपी अनुराग ने बताया कि वह शिमला के दीपक अमोली, सोनीपत (हरियाणा) के संदीप, करनाल (हरियाणा) के रोहित सचदेवा और अलीगढ़ के रेलवे रोड निवासी पियूष फफला से दवाएं खरीदकर लाता है। इनकी सप्लाई आगरा सहित मैनपुरी, फिरोजाबाद, एटा, कासगंज, अलीगढ़ तक में करता है। वह बिल भी देता था। दीपक अमोली की शिमला में दवा फैक्टरी है। वह उससे दवा खरीदता है। वह लोग बिल नहीं देते हैं। बाकी लोग दवा कहां से लेकर आते हैं, जिसकी उसको भी जानकारी नहीं है।

बसों में रखवाकर मंगवाता था दवा के कार्टन

आरोपी ने बताया कि वह माल खुद लेकर नहीं आता है। पुलिस से बचाने के लिए रोडवेज बसों से दवा के कार्टन मंगवाता है। इसके लिए चालक और परिचालक को 500 से 1000 रुपये तक एक बार में देता है। इससे आसानी से माल आ जाता था। उसने आगरा में नकली दवा की बिक्री की थी। अब वह बची हुई दवा को वापस लेकर जा रहा था। तभी एसटीएफ टीम ने पकड़ लिया। उसके पास कार्टन में एमोक्सीसिलिन कैप्सूल आईपी 250 एमजी मिले। टीम अब अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास में लगी हुई है।



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