अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: विमल शर्मा

Updated Thu, 10 Oct 2024 12:06 PM IST

कोरोना के बाद मानसिक तनाव के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक तीन साल में इनकी संख्या दोगुनी हो चुकी है। बच्चों में ऑनलाइन क्लास और युवाओं में नशे की लत भी इसका कारण बन रही है। डॉक्टर म्यूजिक को दवाओं से ज्यादा तरजीह दे रहे हैं।


Stress is taking toll on life, mental patients increased after corona, number doubled three years

तनाव ग्रस्त लोगों की संख्या बढ़ी
– फोटो : Freepik.com

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कोरोना के तीन साल बाद बेशक चीजें अपनी धुरी पर लौट आई हैं लेकिन लोगों में मानसिक तनाव का स्तर बढ़ गया है। 2022 तक एक साल में 9120 केस सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में आए थे। 2024 में अब तक 18000 से ज्यादा मानसिक रोगी जिले के सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में पहुंच चुके हैं।

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मोबाइल व लैपटॉप पर ज्यादा समय बिताने की आदत, ऑनलाइन क्लास के कारण बच्चों को पाठ्यक्रम बोझ लगने लगा है। वहीं युवाओं में नशे की लत उन्हें मानसिक रोगी बना रही है। तनाव के कारण ही 60 वर्ष से पहले लोग डिमेंशिया से पीड़ित हो रहे हैं।

मानसिक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ तनाव नहीं थायराइड की वजह से शरीर में हार्मोंस परिवर्तन या फिर ब्लड प्रेशर की कुछ दवाइयों का साइड इफेक्ट भी मानसिक अवसाद का कारण बन रहा है। सरकारी अस्पताल के अलावा निजी डॉक्टरों के यहां भी मानसिक रोगियों की भीड़ है। डॉक्टर दवाओं से ज्यादा म्यूजिक व व्यवहार थैरेपी को तरजीह दे रहे हैं।



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