संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

Updated Sun, 27 Jul 2025 02:03 AM IST

Studying in dilapidated schools is dangerous for children

जनता इंटर कालेज नौनेर का जर्जर भवन।



मैनपुरी। राजस्थान के झालावाड़ जैसी घटना जिले में भी हो सकती है। यहां भी जर्जर स्कूलों और कॉलेजों में बच्चे पढ़ने के लिए पहुंच रहे हैं। कई जगह तो जर्जर भवनों में बच्चे बैठकर शिक्षा भी ग्रहण कर रहे हैं। यहां यदि राजस्थान जैसा हादसा हुआ तो कई लोगों की जान मुसीबत में आ सकती है।

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क्षेत्र स्थित जनता इंटर कॉलेज नौनेर का भवन लगभग 75 साल पुराना है। इनकी मरम्मत का कार्य नहीं हुआ है। अधिकांश कक्षा कक्ष जर्जर हैं और छत से पानी टपकता है। इनके गिरने का डर रहता है। विद्यालय में कक्षा 6 से लेकर इंटरमीडिएट तक 800 छात्र-छात्राएं अध्ययन हैं। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत एस्टीमेट बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी में फाइल दे दी गई है। बजट ज्यादा होने की वजह से दोबारा से नक्शा बनवाने का कार्य किया जा रहा है। प्रधानाचार्य मयंक यादव का कहना है कि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह से भी इस संबंध में लिखित प्रार्थना पत्र देकर शासन स्तर से सहायता दिलाए जाने के लिए मांग की गई है।बेवर विकास क्षेत्र के गांव टोडरपुर में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित पूर्व माध्यमिक विद्यालय के बच्चे जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं। तीन कमरों में से दो की हालत बेहद खराब है। कक्षाओं का संचालन मैदान में पेड़ के नीचे करना पड़ता है। बारिश में बच्चों को इसी भवन में शरण देनी पड़ती है। प्रधानाध्यापक संजय कुमार ने बताया कि कई बार विभाग को जर्जर भवन के बारे में अवगत करवा चुके हैं लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले दिनों खंड शिक्षाधिकारियों से स्कूलों के जर्जर भवन की रिपोर्ट मांगी थी। 148 स्कूलों में जर्जर भवन की सूची भेजी गई थी। जांच के बाद 65 भवन ऐसे घोषित किए गए जिन्हें ध्वस्त कराना जरूरी है। इसके साथ ही 83 भवन ऐसे हैं जिन्हें वृहद मरम्मत की जरूरत है। हालांकि बीएसए ने इस संबंध में प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी कर कहा है कि इनमें बच्चों को नहीं बैठाया जाए।



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