
सुल्तानपुर में सियारों को आतंक।
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यूपी के सुल्तापुर के खैरहा गांव में सियार को पकड़ने के लिए बंदर का पिंजरा लगाने के बाद भी वनकर्मी गच्चा खा गए। बीती रात वनकर्मियों की ओर से बंदर के पिंजरे में रखा मांस का टुकड़ा लेकर सियार भाग गया। बुधवार सुबह वनकर्मियों की पड़ताल में खैरहा गांव में सियार और कोड़रिया में कुत्तों का पगचिह्न पाया गया। इससे ग्रामीणों में दहशत है।
तीन सितंबर की रात कोड़रिया में एक मासूम को सियार के शिकार बना लेने की घटना के बाद से वन विभाग की टीम दियरा ग्राम पंचायत में डटी है। दो दिन बाद बगल के खैरहा गांव में वन्यजीव की दस्तक से वन विभाग की नींद उड़ गई है। खैरहा गांव निवासी लालती देवी के छप्पर में बंधी बकरी को खा लेने की सूचना के बाद रेंजर ने दोनों गांवों में एक-एक पिंजरा लगवा दिया है।
मंगलवार शाम वनकर्मियों ने सियार को पकड़ने के लिए लालती के घर के पीछे लगाए गए बंदर के पिंजरे में मांस का टुकड़ा रख दिया। रात में करीब दो बजे सियार मांस का टुकड़ा लेकर भाग गया। कुत्तों के शोर मचाने पर वनकर्मियों व ग्रामीणों के पहुंचते ही वह जंगल में भाग गया। मांस के टुकड़ा की छानबीन वनकर्मियों की ओर से गांव में लगाए गए स्पाई नाइट विजन कैमरे से की जा रही है। छानबीन में पाया गया है कि मांस का टुकड़ा लेकर सियार भागा है। रेंजर ने बताया कि कैमरों को जांच के लिए डिवीजन भेजा गया है।
बड़ा पिंजरा भेड़िया, चीता और बाघ के पकड़ने में होता है प्रयोग
वनकर्मियों ने बताया कि बड़े पिंजरे का प्रयोग भेड़िया, चीता और बाघ जैसे आक्रामक जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए किया जाता है। छोटा पिंजरा शरारती बंदरों को पकड़ने के काम आता है। वन्यजीवों को पकड़ने के लिए उसमें मांस का टुकड़ा रखा जाता है। सियार के लिए बकरी का मांस रखा जाता है। खैरहा में लालती देवी के घर के पीछे बंदर पकड़ने का पिंजरा लगाया गया है जबकि कोड़रिया में बड़ा पिंजरा लगाया गया है। रेंजर अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि बड़े-छोटे दो तरह के पिंजरे प्रयोग में लाए जाते हैं। स्पाई नाइट विजन कैमरे से वन्यजीवों की फोटो ली जाती है।
