यूपी में खनन शब्द ने हाहाकार मचा रखा है। हाल ये है कि जो भी अधिकारी व सफेदपोश इसके दायरे में आ रहे हैं वो एजेंसी के निशाने पर आ जा रहा है। वहीं, एक अधिकारी ने अपने मातहत को भ्रष्टाचार के आरोपों में नाप दिया। वहीं, एक जूनियर अधिकारी अभी भी डीरेल चल रहे हैं। पढ़ें, आज की कानाफूसी: 

खनन की खनखनाहट

मार्च का महीना बड़ा ही हलचल भरा है। एक तरफ दुनियाभर में युद्ध से हाहाकार मचा है तो दूसरी तरफ यूपी में खनन नाम के शब्द ने हाहाकार मचा रखा है। यूं समझिए कि इस शब्द के इर्दगिर्द जो भूले-भटके भी आ गया, दिल्ली वाली एजेंसी के रडार में आ गया। लोगों की जेब पर पैनी नजर रखने वाली इस एजेंसी ने अपने कामकाज से पिछले दिनों बुंदेलखंड से लेकर पूर्वांचल तक बवाल काट दिया। इसकी जद में राजधानी के सफेदपोश भी आ गए हैं। सत्ता से लेकर नौकरशाही के गलियारों में खुसपुसाहट है कि जल्द कुछ ‘बड़ा’ होने का अंदेशा है। लेकिन कब, ये भविष्यवाणी करने को कोई तैयार नहीं।

मातहत से इतनी अदावत

बुंदेलखंड के एक जिले में खाकी में अधिकारी और मातहत के बीच अदावत की आजकल खासी चर्चा है। मातहत का आरोप है कि अधिकारी अपने गलत कामों पर पर्दा डालने के लिए उसे फंसा रहे हैं। अधिकारी ने भी अपनी हैसियत दिखाने के लिए मातहत को भ्रष्टाचार के आरोपों में नाप दिया है। मातहत समाजसेवा से जुड़े अपने कार्यों की वजह से चर्चा में रहने के साथ सोशल मीडिया पर भी सक्रिय था, जिसे अब उसने अधिकारी के खिलाफ अपना हथियार बना लिया है। सुना है कि मामला बड़े अफसरों तक पहुंच गया है और तलवार दोनों तरफ चल सकती है।

सूचना लीकेज

एक जूनियर नौकरशाह काफी समय से डीरेल चल रहे हैं। तैनाती तो उन्हें मिली हुई है, पर मनमुताबिक नहीं। बीच में उन्होंने राजधानी से सटे एक जिले में तैनाती की गोटी बिछाई, पर समय से पहले ही मामला लीक हो गया। सारी योजना धरी रह गई। अब जूनियर नौकरशाह खुद ही कह रहे हैं कि केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने की उनकी सेटिंग हो गई है। पांच राज्यों के चुनाव के बाद उनका जाना तय है।… अब लीक तो उनका यह दांव भी हो गया है। देखते हैं कि भविष्य क्या रहता है?

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