
स्वामी प्रसाद मौर्य
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पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने मंगलवार को सपा और विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। वे 22 फरवरी को दिल्ली में नई पार्टी का गठन करेंगे। साथ ही इंडिया गठबंधन में बने रहने का एलान भी किया है। अपने इस्तीफे के बाद आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने सपा के साथ-साथ भाजपा सरकार की नीतियों पर भी जमकर हमला बोला।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि 13 फरवरी को त्यागपत्र देने के बाद सपा की ओर से वार्ता की कोई पहल नहीं की गई। इसलिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे रहे हैं। यह पत्र उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के नाम भी जारी किया। दूसरा पत्र विधान परिषद सभापति को भेजा, जिसमें उन्होंने कहा है कि सपा की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने के कारण नैतिक आधार पर विधान परिषद की सदस्यता से भी त्यागपत्र दे रहा हूं। मौर्य ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि 22 फरवरी को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में बैठक करके आगे की दिशा तय करेंगे और नई पार्टी का गठन करेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आरक्षण को खत्म करने की साजिश कर रही है। जातिवार जनगणना की मांग को ठुकरा रही है। संविधान और लोकतंत्र को खत्म कर रही है। इंडिया गठबंधन में शामिल होकर या बाहर से समर्थन देकर सहयोग करेंगे। समय मिलने पर राहुल गांधी की न्याय यात्रा में भी शामिल होंगे।
अपनी पहल पर आए थे रामगोविंद चौधरी
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि वरिष्ठ समाजवादी नेता रामगोविंद चौधरी को अखिलेश यादव ने उनके पास वार्ता के लिए नहीं भेजा था, बल्कि वह अपनी निजी पहल पर आए थे। उनका हमेशा सम्मान करता रहूंगा।
पीडीए व धर्मनिरपेक्षता की खुद ही हवा निकाल रहे सपा अध्यक्ष
स्वामी ने कहा कि अखिलेश पीडीए और धर्म निरपेक्षता की हवा खुद निकाल रहे हैं। भाजपा ने भी कभी अपने कार्यालय में उस तरह से पूजा अर्चना नहीं की होगी, जिस तरह से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भगवान शालिग्राम की पूजा की।
सपा को बर्बाद करने के लिए रामगोपाल ही काफी
उन्होंने कहा कि सपा को बर्बाद करने के लिए उसके प्रमुख महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ही काफी हैं। राजनीति में उन्हें शिवपाल से सीख लेनी चाहिए। पल्लवी पटेल के मामले को शिवपाल ने अंदरूनी मामला बताया था, जबकि प्रो. रामगोपाल ने कहा कि राज्यसभा प्रत्याशियों को वोट न देने से पल्लवी की सदस्यता चली जाएगी। इससे दोनों (शिवपाल व रामगोपाल) की बातचीत के तरीके में अंतर समझा जा सकता है।
स्वामी के इस्तीफे से भाजपा को होगा फायदा
स्वामी प्रसाद मौर्य विधायकों के मतों से विधान परिषद सदस्य चुने गए थे। उनके इस्तीफा देने से यह सीट भाजपा के खाते में चली जाएगी, क्योंकि विधानसभा में भाजपा और सहयोगी दलों का बहुमत है।
स्वामी प्रसाद मौर्या का इस्तीफा मंजूर
विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने स्वामी प्रसाद मौर्य का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही उनकी सीट रिक्त हो गई।
