swami Vivekananda made his first disciple in Hathras

स्वामी विवेकानंद के पहले शिष्य हाथरस के शरतचंद्र गुप्ता
– फोटो : साेशल मीडिया

विस्तार


स्वामी विवेकानंद का हाथरस से गहरा नाता रहा है। उन्हें अपना पहला शिष्य हाथरस में ही मिला था। हाथरस सिटी रेलवे स्टेशन के तत्कालीन स्टेशन मास्टर शरतचंद्र गुप्ता स्वामी के पहले शिष्य बने थे। इसका जिक्र श्रीरामकृष्ण परमहंस मठ की किताबों में भी मिलता है। इसके बावजूद जिले में उनकी स्मृतियों को सहेजा नहीं गया है। हाथरस सिटी रेलवे स्टेशन पर इस बात का उल्लेख तक नहीं है।

ऐसे हुई स्वामी जी की मुलाकात

स्वामी विवेकानंद युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं। 12 जनवरी 1963 को उनका जन्म हुआ था। 12 जनवरी को उनकी जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद के हाथरस से जुड़ाव का जिक्र श्री रामकृष्ण परमंह मठ की किताबों में भी मिलता है। साल 1888 में स्वामी विवेकानंद हाथरस सिटी रेलवे स्टेशन पर रुके थे। यहां उनकी भेंट तत्कालीन स्टेशन मास्टर शरतचंद्र गुप्ता से हुई। वह स्वामी जी के व्यक्तिव से काफी प्रभावित थे। उन्होंने स्वामी जी से खुद को अपना शिष्य बनाने की इच्छा जाहिर की थी। स्वामी जी ने उन्हें गुरु दीक्षा देने से पूर्व उनकी परीक्षा ली। इस परीक्षा में शरतचंद्र गुप्ता को स्टेशन पर कुलियों से भिक्षा मांगनी थी। परीक्षा में सफल होने पर स्वामीजी ने उन्हें अपने शिष्य के रूप में स्वीकार कर लिया। वह स्वामीजी के ही साथ चले गए। उनका नाम शरतचंद्र से स्वामी सदानंद रखा गया। 

ये परीक्षा देकर बने शिष्य

गुरुदीक्षा देने से पहले स्वामी जी ने उनकी परीक्षा ली। इस परीक्षा में  शरद चंद्र गुप्ता पास हो गए। परीक्षा में सहायक स्टेशन मास्टर को अपने ही स्टेशन के कुलियों से भिक्षा मांगनी पड़ी। इस परीक्षा में शरतचंद्र पास हो गए और स्वामी जी ने उन्हें अपना शिष्य बना लिया। शरतचंद्र ने नौकरी छोड़ दी और स्वामी जी के साथ चले गए। उन्होंने अपना नाम बदल लिया और वह शरतचंद्र से स्वामी सदानंद हो गए। 

फिल्म में है इनका जिक्र

स्वामी विवेकानंद पर वर्ष 1998 में बनी फिल्म में इसका जिक्र है। इसमें अनुपम खेर ने स्टेशन मास्टर का किरदार निभाया है। इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती, हेमा मालिनी, जयप्रदा जैसे कलाकारों ने काम किया था।  

हाथरस सिटी रेलवे स्टेशन

रेलवे स्टेशन पर स्वामी जी की प्रतिमा तक नहीं 

स्वामी विवेकानंद का हाथरस से इतना गहरा नाता होने के बावजूद यहां उनकी स्मृतियों को संरक्षित नहीं किया गया है। हाथरस सिटी रेलवे स्टेशन पर इस बात का कोई उल्लेख नहीं है। यहां एक शिलालेख तक नहीं लगाया गया है। स्टेशन पर स्वामी जी की प्रतिमा तक नहीं है। 

स्वामी विवेकानंद से हाथरस का गहरा नाता है, लेकिन इस ओर कभी कोई कदम नहीं उठाया गया है। विशेष तौर पर रेलवे की ओर से कभी कोई प्रतिमा या शिलालेख हाथरस सिटी रेलवे स्टेशन पर नहीं लगाए गए, जबकि स्वामी विवेकानंद के पहले शिष्य हाथरस सिटी स्टेशन तत्कालीन सहायक स्टेशन मास्टर थे। अब जबकि स्टेशन पर लगभग 60 करोड़ रुपये से सुंदीरकरण का कार्य चल रहा है, फिर भी स्वामी जी से जुड़ी स्मृति को न सहेजना प्रशासन की बेरुखी को दर्शाता है। – कपिल अग्रवाल, युवा व्यापारी नेता। 



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