मार्बल पच्चीकारी अब केवल पत्थरों तक सीमित नहीं रहेगी। ताज महोत्सव में इसका अनोखा फ्यूजन देखने को मिला। यहां हुनरमंद कारीगर चमड़े पर पच्चीकारी की बारीकियां सीख रहे हैं।
उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम के प्रबंध निदेशक राजकमल यादव ने रविवार को पांच दिवसीय विशेष कार्यशाला का ताज महोत्सव में शुभारंभ किया। ओडीओपी और वर्ल्ड डिजाइनिंग फोरम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य दो विधाओं को जोड़कर रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
फोरम के सीईओ अंकुश अनामी ने बताया कि कानपुर में इस कला के मात्र 25-30 विशेषज्ञ ही बचे हैं। चूंकि आगरा लेदर और मार्बल पच्चीकारी दोनों का केंद्र है, इसलिए यहां के कारीगरों को यह हुनर सिखाकर इस कला को वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है।
वैश्विक बाजार पर नजर
कार्यक्रम में मौजूद एक्सपोर्टर आदिल सिद्दीकी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करीब 498.81 बिलियन डॉलर के लेदर मार्केट में इस तरह की कलात्मक कारीगरी की भारी मांग है। यदि आगरा के जूता उद्योग के कारीगर इस फन में माहिर हो जाते हैं, तो भारतीय उत्पादों को विश्व स्तर पर विशिष्ट स्थान मिलेगा। कार्यशाला में कानपुर के 5 विशेषज्ञ, आगरा के 35 कारीगरों को गुर सिखा रहे हैं। पच्चीकारी पर्स, बैग और बेल्ट पर भी उकेरी जा रही है। उपायुक्त उद्योग शैलेंद्र सिंह, एमएसएमई संयुक्त आयुक्त अनुज कुमार भी मौजूद रहे।
