प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत, केटीएस में दोनों क्षेत्रों के बीच सभ्यतागत, सांस्कृतिक, भाषाई और लोगों के बीच संबंधों का सम्मान और यह एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को दर्शाता है। इसके अलावा, सीखने के आदान-प्रदान, सांस्कृतिक विसर्जन, अकादमिक बातचीत और अधिक से अधिक युवा भागीदारी के माध्यम से जुड़ाव को और बढ़ाना है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, आईआईटी मद्रास और बीएचयू वाराणसी मिलकर आयोजन कर रहे हैं। जबकि, केंद्रीय संस्कृति, सूचना व प्रसारण मंत्रालय, पर्यटन, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, उद्योग, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, कौशल विकास मंत्रालय समेत भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम और यूपी सरकार सहयोग कर रही है।

सात श्रेणियों में 1400 से अधिक प्रतिनिधि

तमिलनाडु से सात श्रेणियों में 1400 सदस्यीय प्रतिनिधि दल आ रहा है। इसमें छात्र शिक्षक, लेखक, कृषि व संबद्ध क्षेत्र, पेशेवर व कारीगर, महिलाएं और आध्यात्मिक विद्वान शामिल हैं।

प्रयागराज, अयोध्या के करेंगे दर्शन

आठ दिवसीय अनुभवात्मक दौरे के दौरान तमिलनाडु से आने वाला दल वाराणसी के बाद प्रयागराज और अयोध्या में भगवान श्रीराम के दर्शन करने भी जाएगा। इसके अलावा वाराणसी के महत्वपूर्ण तमिल धरोहर स्थलों में महाकवि सुब्रमण्यम भरतियार का पैतृक निवास, केदार घाट, लघु तमिलनाडु क्षेत्र में स्थित काशी मदम, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और माता अन्नपूर्णा मंदिर के लिए भी जाएंगे। वहीं, दक्षिण भारतीय मेहमान स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, विरासत से रूबरू होंगे।

 



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