
69000 शिक्षक भर्ती मामले में अभ्यर्थी लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।
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69,000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति के लिए बृहस्पतिवार को उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य के आवास का घेराव किया। इसमें 6,800 सूची के चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग की गई। गौरतलब है कि 69,000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी काफी समय से आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने बुधवार को उन्नाव में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी। बृहस्पतिवार को ये अभ्यर्थी उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य के आवास पहुंचकर धरने पर बैठ गए। अभ्यर्थी उनसे मिलना चाह रहे थे। इसे लेकर पुलिस से उनकी नोंकझोंक भी हुई। अभ्यर्थियों का आरोप है कि पुलिस ने एक अभ्यर्थी को थप्पड़ मार दिया। हालांकि अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल की उपमुख्यमंत्री से मुलाकात कराई गई। अभ्यर्थियों ने कहा कि उपमुख्यमंत्री ने उन्हें जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि जल्द नियुक्ति न हुई तो वह आंदोलन जारी रखेंगे। प्रतिनिधिमंडल में वीरेंद्र वीर, अर्चना शर्मा, विक्रम, अमित मौर्य और अन्नू पटेल शामिल थीं। उपमुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद सभी अभ्यर्थियों को बस से ईको गार्डन पहुंचा दिया गया।
तदर्थ शिक्षकों ने सेवा बहाली के लिए निकाली पदयात्रा
अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के तदर्थ शिक्षकों ने सेवा बहाली के लिए बृहस्पतिवार को रॉयल होटल से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय तक पदयात्रा निकाली। निदेशालय में भारी पुलिस बल ने उन्हें रोका तो वे वहीं धरने पर बैठ गए। बाद में माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव को ज्ञापन देकर सेवा बहाली व तीन जिलों में बकाया वेतन दिलाने की मांग की।
तदर्थ शिक्षक संघर्ष समिति के संरक्षक रमेश प्रताप सिंह ने कहा कि 20-25 साल से काम कर रहे तदर्थ शिक्षकों की सेवाएं एक झटके में समाप्त कर दी गई। सेवा बहाली के लिए शिक्षकों ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य, ब्रजेश पाठक व माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी समेत अन्य जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दिया है, लेकिन कोई राहत नहीं मिली है।
समिति के कार्यकारी अध्यक्ष रवींद्र सिंह ने कहा कि मजबूरी में शिक्षकों को दोबारा आंदोलन की राह पकड़नी पड़ी है। उन्होंने बताया कि निदेशक ने ज्ञापन लेते हुए कहा कि एक-दो दिन में तीन जिलों का बकाया वेतन जारी करवा दिया जाएगा। सेवा बहाली पर निर्णय शासन लेगा।
