झांसी। बबीना स्थित इंडो गल्फ फैक्टरी में बिजली गिरने से हुए भीषण विस्फोट के मामले की जांच के लिए शनिवार दोपहर आगरा से पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) की टीम पहुंची। तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच टीम ने अंदर पहुंचकर पड़ताल की। इस दौरान टीम के सदस्यों ने मीडिया से कोई बात नहीं की। करीब तीन घंटे जांच पड़ताल कर सदस्य लौट गए। वहीं, इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) की टीम ने घटना स्थल के आसपास का जायजा लिया।

शुक्रवार देर शाम नयाखेड़ा गांव स्थित फैक्टरी में बिजली गिरने के बाद भीषण विस्फोट हुआ था। इसके बाद वहां आग लग गई। आग बुझाने के दौरान कार चालक नवल किशोर झुलस गया था। मेडिकल कॉलेज में मृत घोषित किया गया। भीषण हादसे के बाद से फैक्टरी के आसपास का पूरा इलाका सील कर दिया गया था। गेट से कुछ दूर पीएसी तैनात कर दी गई। किसी को भी उस ओर जाने की इजाजत नहीं दी गई।

दोपहर करीब दो बजे आगरा से पीईएसओ टीम यहां पहुंची। अंदर विस्फोटक होने की आशंका जताई जा रही थी। इसे देखते हुए सुरक्षा उपकरणों के साथ टीम अंदर पहुंची। अंदर लगाए गए सुरक्षा उपकरण के साथ ही बिजली बोर्ड एवं कनेक्शन भी चेक किए। वीडियो भी बनाया गया। वहीं, इंटेलीजेंस अफसरों ने भी फैक्टरी का जायजा लेने के साथ आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई। पीईएसओ की रिपोर्ट आने के बाद ही फैक्टरी की सील खुल सकेगी।

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मुआवजे की मांग को लेकर थाने में हंगामा

कंपनी की ओर से लिखित भरोसा दिलाने के बाद हुआ अंतिम संस्कार

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हादसे में जान गंवाने वाले नवल किशोर के परिजनों को 70 लाख रुपये का मुआवजा, आश्रित को नौकरी दिलाए जाने की मांग को लेकर गांव के लोगों ने जमकर हंगामा किया। शव को घर में रखकर नाराज लोग थाने जा पहुंचे। मुआवजा की घोषणा न होने तक अंतिम संस्कार न करने की बात कही। सीओ रामवीर सिंह ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। कंपनी के अधिकारियों को थाने बुलाया गया। काफी देर तक चली पंचायत के बाद कंपनी ने नियमों के मुताबिक मुआवजा देने का भरोसा दिलाया। लिखित आश्वासन के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन समेत अन्य कांग्रेस नेता भी पहुंच गए। उन्होंने परिजनों के लिए तत्काल मुआवजा राशि घोषित करने के साथ मामले की जांच कराने की मांग की है।

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विस्फोटक बनाने वाली फैक्टरी में नहीं लगा था तड़ित चालक

खदानों के लिए खतरनाक विस्फोटक बनाने वाली इंडो गल्फ फैक्टरी की इमारत पर बिजली गिरने से बचाने वाला तड़ित चालक ही नहीं लगा था जबकि जिस जगह फैक्टरी है, उसे देखते हुए यह अनिवार्य है। फैक्टरी काफी सूने इलाके में है। आसपास पेड़ एवं पहाड़ हैं। पूरे इलाके में सिर्फ फैक्टरी की ही इमारत है। ऐसे में बिजली गिरने की आशंका यहां सर्वाधिक है। हादसा फैक्टरी बंद होने के बाद हुआ। जांच के लिए आगरा से आई टीम ने भी इसकी जांच की। इस संबंध में फैक्टरी मैनेजर राजेश जैन से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन, उनकी ओर से कोई भी जवाब नहीं दिया गया।



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