
रायबरेली का प्रथम स्थान पर जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और सीएम
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रायबरेली। स्वच्छ हवा के लिए देश में तीन लाख से कम आबादी वाले नगर पालिका क्षेत्र में रायबरेली को पहला स्थान मिला है। रायबरेली को स्वच्छ सर्वेक्षण सूची में 195.5 अंक मिले हैं। वीआईपी शहर रायबरेली स्मार्ट सिटी की रेस में भले ही मेरठ से कुछ अंक से पीछे रह गया हो, लेकिन इस उपलब्धि ने रायबरेली को देश में एक बार फिर नई लोकप्रियता दी है।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम अभियान में शामिल रायबरेली देश का पहला जिला है, जिसका प्रदूषण लेबल सामान्य से कम है। इसके पीछे गोरखपुर मॉडल को कारगर माना जा रहा है। इस मॉडल से ही वायु प्रदूषण में गिरावट आ रही है। यही कारण है कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम अभियान में शामिल रायबरेली जिले का वायु प्रदूषण बीते दो साल में 35 फीसदी तक सुधर गया है।
प्रदूषण विभाग का कहना है कि मॉनीटरिंग से इसमें कामयाबी मिली है। साथ ही नगर पालिका की तरफ से की गई पहल से शहर में वायु प्रदूषण का प्रतिशत लगातार घटा रहा है। रायबरेली स्मार्ट सिटी की रेस में मेरठ के बराबर रहा था, लेकिन वायु प्रदूषण के चलते रायबरेली को स्मार्ट सिटी की दौड़ से बाहर होना पड़ा था। इसके बाद रायबरेली शहर के वायु प्रदूषण को सुधारने के लिए व्यापक बदलाव किए गए। रिकाॅर्ड पौधरोपण किया गया। प्रदूषण विभाग ने पौधरोपण के साथ मानीटरिंग शुरू की।
वर्ष 2018-19 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर मॉडल रायबरेली के साथ प्रदेश के 31 जिलों में लागू करने के निर्देश दिए। जिस कारण हर साल रायबरेली के वायु प्रदूषण में सुधार आता रहा। नतीजा यह है कि वर्ष 2024 की जारी रिपोर्ट में रायबरेली को स्वच्छ वायु में पहला स्थान हासिल हुआ है।
धूल और धुएं पर पाया गया काबू
शहर में पीएम 10 प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण धूल था। पीएम-10 हवा में वह जहरीले कण होते हैं जो सांस के साथ शरीर में जाते हैं और कैंसर तथा फेफड़ों को नुकसान पहुंचा कर सांस का रोगी बनाते है। यह बहुत छोटे धूल के कण होते हैं। शहर में धूल की बात की जाए तो गंदगी के विभिन्न कारक में यह सबसे अधिक हैं। इनकी हवा में हिस्सेदारी करीब 88 प्रतिशत है।
नगर पालिका ने इसे हटाने के लिए एअर कैरियर वाहन का उपयोग करना शुरू किया है। सप्ताह में तीन दिन शहर की सड़कों पर यह वाहन चलते हैं और 40 से 50 टन धूल एकत्र होती है, जिससे डिस्पोज किया जाता है। इसी तरह धूल का दूसरा कारक पीएम-2.5 है। यह भी धूल के वह कण हैं जो वाहनों के माध्यम से हवा में फैलते हैं। इनको भी नियंत्रित करने के लिए नगर पालिका स्प्रिंकलर सिस्टम (पानी का छिड़काव) कराती है। सप्ताह में एक दिन शहर की सड़कों की धुलाई होती है। इससे वाहनों के धुएं के फैलाव पर भी नियंत्रण पाया गया है।
इस तरह सुधरी हवा
-शहर में इंटरलाॅकिंग के साथ सड़कों का डामरीकरण किया गया।
-शहर के सीमा क्षेत्रों में पौधारोपण किया गया।
-कूड़ा निस्तारण प्लांट की स्थापना व एअर इंडेक्स मॉनीटर को सक्रिय किया।
-मिल एरिया के साथ सभी चौराहों पर हवा की गुणवत्ता की हर माह जांच।
-शहर के प्रमुख चौराहों पर जाम न लगने देना।
-ईंट भट्ठा उद्योगों को वायु प्रदूषण की एनओसी अनिवार्य करना।
-एसटीपी की स्थापना व कूड़ा निस्तारण प्लांट से खाद बनाना।
-पार्कों में कंपोस्ट पिट निर्माण के साथ फूल वाले पौधे लगाना।
-हाईटेक इंदिरा और उद्यान पार्क की स्थापना।
वायु गुणवत्ता पर नजर
वर्ष वायु में अपशिष्ट कण
2022
2023
2024
नोट : वायु में अपशिष्ट कण पीएम 10 यूजी/एम 3 के अनुसार।
रंग लाई मेहनत
नगर पालिका के पास आय के साधन बहुत कम है, फिर भी जिस प्रकार हमारे कर्मचारियों और अधिकारियों ने मेहनत की वह सराहनीय है। नगर की जनता ने उसमें भरपूर सहयोग कर रायबरेली नगर पालिका परिषद का नाम देश में रोशन कर दिखाया है।
– शत्रोहन सोनकर, नगर पालिकाध्यक्ष
लोग भी हो रहें जागरूक
प्रदूषण विभाग के साथ मिलकर शहर की हवा को स्वच्छ बनाने का अभियान चल रहा है। लोगों में भी जागरूकता जगाई जा रही है। इसका परिणाम सामने आया है। रायबरेली शहर को स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में पहला स्थान मिला है।
– स्वर्ण सिंह, ईओ, नगर पालिका
