The building was found but the doctor was not found

भिनगा बहराइच के मध्य ​स्थित सीएचसी सोनवा। 
– फोटो : संवाद

तुलसीपुर (श्रावस्ती)। पीएचसी से उच्चीकृत हो सीएचसी बने सोनवा में अभी भी सुविधाओं का टोटा है। यहां आने वाले मरीजों व दुर्घटनाओं के घायलों को भिनगा व बहराइच रेफर कर दिया जाता है। अपना भवन मिलने के बाद भी आवश्यक सुविधाएं न होने से यह अस्पताल क्षेत्रवासियों के लिए सफेद हाथी बना हुआ है।

सोनवा थाने के बगल स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत कर सीएचसी का दर्जा दिया गया था। यहां सीएचसी भवन का निर्माण कराकर वर्ष 2019 में स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया। लेकिन यहां आज भी पीएचसी स्तर की ही सुविधा मुहैया कराई जा रही है। यहां आयुष चिकित्सक सहित पांच चिकित्सक, दो महिला चिकित्सक, चार वार्ड ब्वाय, चार फार्मासिस्ट व चार स्वीपर के पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष तीन पुरुष चिकित्सक व एक महिला चिकित्सक, दो फार्मासिस्ट, एक स्वीपर ही तैनात है। यहां तैनात प्रभारी चिकित्सक को वित्तीय अधिकार न मिलने के कारण अस्पताल आज भी गिलौला सीएचसी के रहमोकरम पर संचालित हो रहा है।

इसलिए भी महत्वपूर्ण है सीएचसी

भिनगा व बहराइच के बीच होने के कारण सोनवा सीएचसी मार्ग दुर्घटनाओं में घायलों की जान बचाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। साथ ही यहां आपातकालीन सेवा मिलने लगे तो क्षेत्र के ककंधू, गिलौली, हुसैनपुर खुरुहुरी, रत्नापुर, बरावांहरगुन, धुसवां, भिठिया चिचड़ी, दिकौली, उत्तमापुर, गुजरवारा, मालभौखारा, तुलसीपुर, मनिहारतारा, चौगोई, सहित 25 गांवों के लोगों को अनावश्यक 20 किलोमीटर बहराइच या 25 किलोमीटर मल्हीपुर या 22 किलोमीटर गिलौला या 25 किलोमीटर भिनगा ना जाना पड़े। वहीं दिकौली में लगने वाले जेठ मेला सहित प्रत्येक रविवार को दिकौली के बड़े पुरुष की मजार पर आने वाले जायरीनों व अकीदतमंदों को भी सहूलियत मिलने लगेगी।

नहीं हो सकी सकारात्मक पहल

कई बार वित्तीय व मैन पावर के लिए सीएमओ को पत्र लिखा है। इस पर अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हो सकी है। वित्तीय अधिकार व चिकित्सक सहित पैरामेडिकल स्टाफ मिल जाए तो अस्पताल पूरी तरह से वजूद में आ जाएगा। -डाॅ. प्रमोद कुमार सिंह सीएचसी अधीक्षक सोनवा



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