लखनऊ। लोहिया संस्थान में वीआईपी मरीजों के इलाज के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। संस्थान प्रशासन ने इसके लिए बाकायदा लिखित आदेश जारी किए हैं, ताकि माननीयों की सेवा में कोई कमी न रह जाए, लेकिन दूरदराज से आने वाले आम और गरीब मरीजों के यही संस्थान बेरहम हो जाता है। हाल यह है कि इमरजेंसी में भर्ती बुजुर्ग महिला को रात के अंधेरे में बाहर निकाल दिया गया और वह पूरी रात स्ट्रेचर पर तड़पती रही।
बाराबंकी की बुजुर्ग महिला 54 वर्षीय निर्मला को किडनी में तकलीफ थी। सोमवार दोपहर बेटे दिलीप ने उन्हें लोहिया संस्थान की इमरजेंसी में भर्ती कराया था। दोपहर करीब तीन बजे भर्ती होने के बाद रात करीब नौ बजे डॉक्टरों ने उन्हें यह कहकर बाहर कर दिया कि अब ओपीडी में दिखाना होगा।
ऐसे में बिना दवा, बिना जांच, बिना रहम परिजन पूरी रात निर्मला को ओपीडी के बाहर स्ट्रेचर पर लेकर बैठे रहे। मंगलवार सुबह जब ओपीडी में परचा बनवाने का समय आया तो भीड़ इतनी थी कि घंटों इंतजार के बाद जब परचा बना, तब डॉक्टर ओपीडी से जा चुके थे। परिजनों का आरोप है कि समय पर इलाज न मिलने से उन्हें मरीज को बिना इलाज ही वापस ले जाना पड़ा।
ओपीडी के बाहर जमीन पर पड़ा तड़पता रहा मरीज
एक अन्य मामला गोसाईंगंज निवासी पवन कुमार का है, जिन्हें मंगलवार सुबह उनकी पत्नी अनीता ओपीडी लेकर पहुंचीं। मरीज का बीपी और शुगर लेवल बहुत बढ़ा हुआ था, लेकिन परचा काउंटर पर लंबी कतार के कारण उन्हें तुरंत इलाज नहीं मिल सका। पत्नी के मुताबिक, सुबह 10 बजे लाने के बाद दो घंटे तक लाइन में लगे रहे, लेकिन परचा नहीं बन पाया। इस दौरान मरीज गेट के पास जमीन पर तड़पता रहा और सिस्टम तमाशा देखता रहा। इलाज न मिलने से उनकी हालत बिगड़ती चली गई।
Iओपीडी में मरीज को दिखाने के लिए परचा जरुरी है। यदि मरीज को परचा बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने तक में कोई परेशानी आती है तो हेल्प डेस्क और पीआरओ से संपर्क कर सकता है। बुजुर्ग महिला मरीज को इमरजेंसी से किस वजह से रात में हटाया गयाए इसकी जांच कराई जाएगी। I
I- डॉ. भुवन चंद्र तिवारी, प्रवक्ता लोहिया संस्थानI
स्ट्रेचर पर पड़ी महिला।