अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड में कृष्ण भक्ति की परंपरा सदियों पुरानी है। यहां के आम जनमानस से लेकर राजा-रजवाड़े तक भगवान कृष्ण के भक्त रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चार सौ साल पहले ओरछा के राजा वीर सिंह जूदेव ने मथुरा में कृष्ण जन्मस्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। बाद के दिनों में औरंगजेब ने इसे ध्वस्त करा दिया था।
रामराजा सरकार के बुंदेलखंड में कृष्ण भक्ति भी खूब होती है। यही वजह है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की रौनक पूरे बुंदेलखंड में नजर आती है। गांव-गांव का माहौल कृष्णमय हो जाता है। जगह-जगह झांकियां सजाई जाती हैं और हर ओर नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की गूंज सुनाई देती है। इसी से प्रभावित होकर शील प्रभुपाद झांसी में इस्कॉन की स्थापना करने वाले थे लेकिन भवन न मिल पाने की वजह से उनकी मंशा पूरी नहीं हो पाई थी। ओरछा के राजा वीर सिंह बुंदेला ने सन 1618 में मथुरा में श्रीकृष्ण जन्म स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर के निर्माण पर तब 33 लाख रुपये खर्च किए गए थे। कहा जाता है कि मंदिर इतना भव्य और ऊंचा था कि वह आगरा तक से नजर आता है। लेकिन औरंगजेब के शासनकाल में मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था। इसका उल्लेख वीर सिंह बुंदेला के दरबारी वीर मैत्रेय की पुस्तक प्रतिष्ठा प्रकाश में भी मिलता है।
ओरछा के राजा वीर सिंह बुंदेला बेहद धार्मिक प्रवृत्ति के थे। उन्होंने अयोध्या में भी मंदिर का निर्माण कराया था। इसके अलावा, मथुरा में भी श्रीकृष्ण जन्म स्थान पर उन्होंने भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। इतिहास में इसका उल्लेख मिलता है। – डा. पीके अग्रवाल, सेवानिवृत्त आईएएस और लेखक
