– बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानू सहाय ने किया वाद दाखिल, दिल्ली से लेकर झांसी तक के 11 अफसरों को बनाया पार्टी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जीवनदायिनी पहूज नदी की बदहाली का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) पहुंच गया है। बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानू सहाय ने वाद दाखिल किया है। उन्होंने दिल्ली से लेकर झांसी तक के 11 अफसरों को मुकदमे में प्रतिवादी बनाया है।
बुंदेलखंड की प्राचीन नदियों में से एक पहूज इन दिनों बदहाली का शिकार है। शासन-प्रशासन ने उसे उसके हाल पर छोड़ रखा है। हालात ऐसे हैं कि महानगर के चार नालों का गंदा पानी नदी में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा नदी में जलकुंभी, गाद और कचरे की भी भरमार है। कई स्थानों पर तो नदी गंदे नाले जैसी नजर आती है और इसमें से दुर्गंध आती है। अमर उजाला की ओर से नदी के पुनरुद्धार के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
वाद में 19 बिंदु शामिल
एनजीटी को बताया गया है कि झांसी प्रशासन और नगर निगम द्वारा पहूज में नाले-नालियों का गंदा पानी व ठोस अपशिष्ट डालकर प्रदूषित किया जा रहा है, जबकि न्यायालयों व एनजीटी की ओर से नालों का दूषित जल नदियों में न डाले जाने को लेकर आदेश जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा महानगर की महायोजना में नदी के दोनों ओर 200 मीटर की हरी पट्टी का प्रावधान किया गया है, जिसमें 75 मीटर तक कोई भी निर्माण अनुमन्य नहीं होगा। साथ ही नदी के किनारे ग्रीन एरिया के रूप में भूमि भी प्रस्तावित की गई है। वाद में बताया गया है कि केंद्र व राज्य सरकार की ओर से नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की गईं हैं, बावजूद संबंधित विभागों की ओर से उन योजनाओं के अनुक्रम में पहूज नदी का सीमांकन, जीर्णोद्धार, सफाई और ग्रीन एरिया विकसित करने के लिए कोई प्रभावी प्रयास नहीं किया गया। यह स्थिति तब है जब पहूज नदी से रोजाना छह एमएलडी पानी दतिया गेट फिल्टर तक पहुंचाया जाता है, जिसकी आपूर्ति नगर के 20 से अधिक क्षेत्रों में की जाती है। भानु सहाय ने दाखिल किए गए वाद के जरिये पहूज नदी की उच्च स्तरीय तथ्यात्मक एवं सटीक जांच कराकर दोषियों के खिलाफ प्रदूषक भुगतान के सिद्धांत के अनुसार कार्यवाही करने और नदी को उसका मूल स्वरूप वापस लौटाने की मांग की।
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पहूज नदी से झांसी का भावनात्मक रिश्ता है। यह नदी शहर की एक बड़ी आबादी को पेयजल उपलब्ध कराती है। खेतों की सिंचाई के लिए भी पानी का बंदोबस्त करती है। बावजूद, उसे उसके हाल पर छोड़ रखा है। शहर के नालों का गंदा पानी नदी में छोड़ा जा रहा है। ठोस अपशिष्ट भी इसमें डाला जा रहा है, जिससे नदी की तलहटी में गाद, कीचड़ जमा हो गया है। पूरी उम्मीद है कि एनजीटी इस मामले को संज्ञान में लेकर नदी को पुनर्जीवन देने की दिशा में बड़ी पहल करेगी।
– भानु सहाय, अध्यक्ष-बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा
