आगरा। भाई की गैर इरादतन हत्या के मामले में अदालत ने ताजगंज थाना क्षेत्र के पाक टोला निवासी हरी सिंह को दोषी पाया। यह दिवंगत बेदरिया राम गजक व्यवसायी के बेटे हैं। एडीजे-26 अमरजीत ने उसे आजीवन कारावास और 1.10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इसी घटना में शामिल हरी सिंह के तीन भाइयों पुनीत, विनीत और केशव पाल को 50-50 हजार रुपये की दो जमानत एवं इसी राशि के व्यक्तिगत बंधपत्र एक साल की परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया गया। व्यापार को संबंध में भाइयों में वर्ष 2007 में झगड़ा हुआ था।
थाना ताजगंज में दिवंगत बेदरिया के पौत्र विमल कुमार ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि उनके पिता गुमान सिंह गजक का व्यापार करते थे। 16 नवंबर 2007 की सुबह 7 बजे वह पिता गुमान सिंह व अन्य परिजन के साथ घर के दरवाजे पर खड़े थे। इस दौरान चाचा हरी सिंह, केशव पाल, पुनीत और विनीत हाथों में तलवार और लाठी-डंडे लेकर आ गए।
आरोपी पहले से व्यापार में उनके पिता से रंजिश मानते थे। गाली गलौज का विरोध करने पर चाचा हरी सिंह ने पिता गुमान सिंह को तलवार से गंभीर रूप से घायल कर दिया। घर के अन्य परिजन के साथ भी लाठी-डंडों से हमला किया। चीख-पुकार सुनकर मोहल्ले के लोगों ने हस्तक्षेप किया तो आरोपी धमकी देते हुए चले गए।
स्थानीय लोगों की मदद से उन्होंने पिता को अस्पताल में भर्ती कराया। 6 दिन बाद पिता की मौत हो गई। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, मारपीट, गाली गलौज और धमकी देने के आरोप में केस दर्ज किया था।
अभियोजन पक्ष ने आरोपियाें को सजा दिलाने के लिए वादी मुकदमा विमल सिंह, विनोद कुमार, शांति देवी, रोहित पाल, डॉ. आरएस सतेंद्र, पुलिसकर्मी मुबीन अहमद, दरोगा गुलाब सिंह, डॉ. चंद्रप्रकाश, डॉ. संजय कुमार गुप्ता, एसओ सुनील कुमार सिंह, दरोगा जितेंद्र कुमार को गवाही के लिए अदालत में पेश किया। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त तलवार और उस पर लगे खून की रिपोर्ट व अन्य साक्ष्य पेश किए थे। सुनवाई में यह मजबूत आधार बने।
