
विकास भवन के निकट स्थित विद्युत उपकेंद्र में नदार अग्निशमन शमन संयंत्र।
श्रावस्ती। भीषण गर्मी में अक्सर फाॅल्ट और लोड के कारण फीडर जल रहे हैं। कई बार इनकमिंग व आउटगोइंग केबिल भी जल जाती है। इसके बावजूद किसी भी उपकेंद्र में आग से निपटने के इंतजाम नहीं है। जहां पूर्व में अग्रि सुरक्षा संयंत्र रखे भी हैं वह भी देखरेख के अभाव में बेमानी साबित हो रहे हैं।
जिले में 132 केवी उपकेंद्र भिनगा सहित भिनगा टाउन, आईसीडीएस बगुरइयां, कटरा, इकौना नगर, सीताद्वार, गिलौला, भंगहा, घोलिया, उल्लहवा, जमुनहा, लक्ष्मण नगर इकौना, मध्य नगर सहित लक्ष्मनपुर बाजार.उपकेंद्र स्थापित हैं। जहां अक्सर तकनीकी खराबी व ओवरलोडिंग के कारण कभी फीडर तो कभी इनकमिंग तो कभी आउटगोइंग केबिल जलती रहती है। इतना ही नहीं लाइनों में फाॅल्ट व अधिभार के कारण ट्रांसफार्मर, एबी केबल व इंसुलेटर भी फुंकते रहते हैं। ऐसे में कहीं कोई बड़ी घटना न हो इसके लिए ज्यादातर उपकेंद्रों पर अग्निशमन सुरक्षा संयंत्र ही नहीं हैं। जहां है भी वहां बेमानी साबित हो रहे हैं। इतना ही नहीं सीओटू सिलेंडर भी जब से उपकेंद्र मंगाए गए। तब से आज तक उनकी जांच नहीं हुई। अब यहां आग पर काबू करने के लिए बाल्टी में धूल व रेत रख कर काम चलाया जा रहा है।
आईसीडीएस बगुुरइयां में धूल व रेत की भी व्यवस्था नहीं है। विगत वर्ष जिले में आई राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के कार्यक्रम को देखते हुए यहां रखी धूल व रेत भरी बाल्टी उठा ली गई थी। तब से इसे वापस मंगाने की जरूरत ही नहीं समझी गई। इस बारे में अधिशाषी अभियंता दिलीप कुमार मौर्य बताते हैं कि उपकरणों में आग लगने पर धूल व रेत ही कारगर हो सकती है। वहीं इस बारे में एफएसओ संजय कुमार जायसवाल का कहना है कि बिजली निगम की ओर से न तो कभी संयंत्रों की जांच कराई जाती है और न ही उसे रिफलिंग के लिए कोई पत्र ही भेजा गया है।
