संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

Updated Sat, 12 Oct 2024 11:55 PM IST

There was a pavilion for music practice in Sitaramji temple.

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कासगंज। तीर्थनगरी सोरोंजी का पुरातात्विक महत्व का सीतारामजी मंदिर 10वीं से 11वीं शताब्दी का मंदिर है। मौजूदा मंदिर पुराने मंदिर के मंडप में व्यवस्थित है। जहां कभी संगीत की साधना होती थी। यह महत्वपूर्ण जानकारी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पुरातत्ववेत्ता प्रो. एमके पुंढीर ने मंदिर में पहुंचकर अध्ययन के बाद दी। उन्होंने मंदिर की प्राचीन शिलाओं की नक्काशी का विश्लेषण कर यह निष्कर्ष निकाला।प्रोफेसर पुंढीर ने बताया कि यह मंदिर 10वीं से 11वीं शताब्दी के मध्य निर्मित हुआ है। यह एक टीले पर स्थित है। मंदिर तोड़े जाने के बाद मंडप का जो हिस्सा शेष था उसी में मंदिर को व्यवस्थित कर दिया गया लेकिन इस मंडप से यह स्पष्ट हुआ है कि यहां संगीत की साधना होती थी। उन्होंने बताया कि मंदिर में चारों दिशाओं में निकास द्वार बनाए गए हैं। मंदिर का आंतरिक व वाह्य आवरण पर उत्कृष्ट नक्काशी है। जो नक्काशी पत्थरों पर उकेरी गई हैं वह भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों को व्यक्त करती है। उन्होंने कहा कि टीले पर बना यह मंदिर विभिन्न संस्कृतियों को समेटे हुए है। मंदिर की संरचना से यह स्पष्ट होता है। काफी देर तक पुरातत्ववेत्ता के साथ पहुंची टीम ने अध्ययन किया। मंदिर परिसर की माप-तौल की। पत्थरों की नक्काशी की वीडियो बनाई। इसके पश्चात यह टीम ने बटुकनाथ मंदिर पहुंचकर वहां भी पुरातात्विक दृष्टि से अध्ययन किया।

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