संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ

Updated Mon, 19 Aug 2024 02:45 AM IST

Threat looms on the existence of Tendwa village, Rapti intensifies deforestation

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इकौना (श्रावस्ती)। जिम्मेदारों की वादाखिलाफी जगरावलगढ़ी के मजरा टेंडवा के ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है। अब राप्ती नदी की धारा सीधे गांव से टकरा रही है। ग्रामीण खुद अपने घर तोड़ ईंटों को सुरक्षित रख रहे हैं । ऐसे ही रहा तो गांव का वजूद ही समाप्त हो जाएगा।

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इकौना के ग्राम जगरावल गढ़ी के मजरा टेड़वा में बीते एक माह से राप्ती कटान कर रही है। यहां करीब 20 मकान नदी की धारा में समाहित हो चुके हैं। इस बीच नदी का रुख तेजी से गांव की तरफ मुड़ा और फिर देखते ही देखते कटान शुरू हो गया। सैकड़ों बीघे कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। लोगों के मकान नदी की कटान के मुहाने पर आ गए हैं। इससे बचने के लिए वे स्वयं अपना आशियाना तोड़ कर ईंट व अन्य गृहस्थी का सामान निकालने में जुटे हैं।

ग्रामीण संतोष कुमार ने बताया कि तीन माह पूर्व ही पैसा एकत्र कर मकान बनवाया था। अब उसे ही अपने हाथों से तोड़ना पड़ रहा है। विगत दिनों विधायक रामफेरन पांडेय के साथ गांव पहुंचे डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने कटान प्रभावितों को दूसरी जगह बसाने व सहूलियत देने का आश्वासन दिया था, जिसपर अब तक अमल नहीं हो सका है।

इनके घरों पर गहराया संकट

टेंड़वा निवासी संदीप, रामगोपाल, विनय, राजेंद्र, गोबरे, पवन, बबलू, त्रिलोकी, अनूप, अनिरुद्ध, गोविंद, मुंशी, महेश, विंदेश्वरी, अखिलेश, राजू, सचिन व शिवकुमार सहित 24 से अधिक मकान कटान की चपेट में हैं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि महेश कुमार मिश्र ने बताया कि पैमाइश न होने से कटान प्रभावितों को जमीन उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। लोगों के रहने के लिए पंचायत भवन में व्यवस्था कराई गई है, जो पर्याप्त नहीं है। यदि बाढ़ आई तो समस्या बढ़ जाएगी।



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