Umesh Pal murder case: Atiq Ahmed's name is past, Sultanate collapsed in a year

अतीक अहमद-अशरफ। फाइल फोटो
– फोटो : अमर उजाला।

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24 फरवरी यानी शनिवार को विधायक राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल और उसके दो अंगरक्षकों को गोली, बम से उड़ाने की घटना के एक वर्ष पूरे हो जाएंगे। यह महज एक गवाह और दो पुलिसकर्मियों का कत्ल नहीं था। सरेआम बम-गोलियां बरसाकर तीन बेगुनाहों की नृशंस हत्या के साथ ही लड़खड़ा रहे आतंक के साम्राज्य को फिर से खड़ा करने की साजिश भी थी।

मकसद अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को यह बताना था कि अंजाम वही होगा, जो अरसे से होता आया है। सरकार ने इसे अपने इकबाल के लिए चुनौती माना और फिर जो हुआ, वह इतिहास बन गया। खौफ बना अतीक अहमद का नाम अतीत हो गया। जुर्म की सल्तनत तो ढही ही, कुनबा भी बिखर गया। उधर, दोस्त को इंसाफ दिलाने की लड़ाई में जान गंवाने वाले उमेश पाल व उनके दो अंगरक्षकों को न्याय दिलाने की कार्रवाई एक साल में कहां तक पहुंची, इसकी पड़ताल इस विशेष कवरेज में…।

प्रदेश भर की सनसनी बने उमेश पाल व उनके दो अंगरक्षकों की हत्या की वारदात को शनिवार को एक साल पूरे हो गए। इन 12 महीनों में पुलिस की ओर से की गई जांच पड़ताल में अब तक कुल 28 मुल्जिमों के नाम सामने आए हैं। इनमें से अतीक-अशरफ समेत सात मिट्टी में मिल चुके हैं, तो 10 सलाखों के पीछे हैं। पांच-पांच लाख के तीन इनामी शूटरों समेत 11 आरोपियों के संबंध में विवेचना जारी है। इनमें फरार चल रहीं अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन, भयाहु जैनब फातिमा उर्फ रूबी के अलावा तीन पांच-पांच लाख के इनामी शूटर व जेल में बंद बेटे उमर, अली और एक अन्य बेटा अहजम व एक नाबालिग बेटा भी शामिल है।



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