
प्रतीकात्मक तस्वीर
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अप्रैल से किसानों के बिजली बिल माफी की घोषणा की गई है, जबकि वसूली अक्तूबर तक की हो रही है। इसको लेकर किसान व बिल जमा करने में लगे कर्मचारियों के बीच उपकेंद्रों पर नोकझोंक हो रही है। वहीं, विभागीय अफसर इसके पीछे तकनीकी गड़बड़ी का हवाला दे रहे हैं।
किसानों के लिए अप्रैल से निजी नलकूप बिल माफी की घोषणा की गई है। इसके तहत कृषि विभाग ने निजी नलकूप को मुफ्त बिजली देने के लिए ऊर्जा विभाग को 900 करोड़ का बजट भी दे दिया है। इस बीच एकमुश्त समाधान योजना शुरू हो गई है। किसान बिल जमा करने के लिए उपकेंद्र पर पहुंच रहा है तो उससे अक्तूबर तक का बिल लिया जा रहा है।
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सूत्र बताते हैं कि अभी तक अप्रैल से नलकूप का बिल माफ करने का शासनादेश जारी नहीं किया गया है। ऐसे में कॉर्पोरेशन ने विभागीय सॉफ्टवेयर में बदलाव नहीं किए हैं। ऐसे में पहले की तरह हर माह बिल जुड़ता जा रहा है। तर्क दिया जाता है कि जितना बिल दिख रहा है, उसे जमा करें। भविष्य में उसे समायोजित कर दिया जाएगा।
मार्च तक का ही बिल जमा करें
निदेशक (वाणिज्य) पावर कॉर्पोरेशन अमित श्रीवास्तव का कहना है कि उपभोक्ताओं को सिर्फ मार्च तक का ही बिल जमा करना है। यदि कहीं समस्या आ रही है तो संबंधित एसडीओ और एक्सईएन से संपर्क करें। यदि किसी ने अधिक बिल जमा कर दिया है तो उसके खाते में अतिरिक्त रहेगा।
