त्वरित बुद्धि एवं अदम्य साहस का परिचय देकर बासौनी के झरनापुरा गांव के अजयराज ने 25 जुलाई को मगरमच्छ के हमले में अपने पिता वीरभान सिंह की जान बचाई थी। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिलते ही अजयराज देश भर के बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से पुरस्कार लेने एवं पीएम नरेन्द्र मोदी से बातचीत कर घर लौटे अजयराज ने बताया कि अब फौजी बन कर देश के लिए लडूंगा। पुरस्कार से हौसला बढ़ा है। अजयराज ने बताया कि प्रधानमंत्री ने मगरमच्छ के हमले की घटना पूछी तो उन्हें बताया कि पिता अपनी बकरियों को चंबल नदी में पानी पिला रहे थे। इसी दौरान वह पानी भरने लगे, मगरमच्छ उनके पैर को अपने जबड़े में जकड़ कर नदी में खींच रहा था। पिता ने आवाज दी तो वह डंडा लेकर नदी में कूद गया।

मगरमच्छ के सिर पर 10-15 डंडे मारे, लेकिन पिता के पैर को नहीं छोड़ा, कुछ डंडे आंख पर मारे, तब मगरमच्छ उनको छोड़ कर भाग गया। पिता को सहारा देकर नदी से बाहर लाए और परिजनों के साथ इलाज को अस्पताल ले गए। इतना सुनने के बाद प्रधानमंत्री ने पीठ थपथपा कर शाबासी दी। उन्होंने पढ़ाई के बारे में पूछा तो बताया अभी चौथी में हूं, उन्होंने कहा खूब पढ़ो। अजयराज ने प्रधानमंत्री से गांव के लिए सड़क मांगी। प्रधानमंत्री ने चॉकलेट और बिस्कुट खिलाए। अजयराज ने बताया कि खुश हूं, हौसला बढ़ा है।



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