अभ्यर्थियों को दिव्यांग दिखाकर प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले दो सॉल्वरों की नौकरी पर भी खतरा है। ये दोनों सरकारी नौकरी में हैं। पुलिस ने उनके विभाग को मामले की रिपोर्ट भेज दी है। पहले दोनों निलंबित किए जाएंगे। फिर विभागीय कार्रवाई होगी। दोनों पर बर्खास्तगी का भी खतरा है।
एसटीएफ ने जिस सॉल्वर गैंग को पकड़ा था उसमें दिल्ली निवासी नीरज झां भी शामिल था। वह दिल्ली में पीडब्ल्यूडी में क्लर्क है। वहीं सॉल्वर आकाश अग्रवाल झांसी में पीडब्ल्यूडी में बाबू है। ये सभी पैसों के लालच में गिरोह के सरगना मनीष मिश्रा से जुड़े थे। उसके कहने पर प्रतियोगी परीक्षाओं में सॉल्वर के तौर पर शामिल होते थे। एवज में मोटी रकम वसूलते थे। पुलिस ने दोनों विभागों को मामले की रिपोर्ट भेजी है। जिसमें आरोपियाें की फर्जीवाड़े की विस्तृत जानकारी है। साथ ही ये भी बताया गया है कि दोनों जेल में हैं। अब संबंधित विभाग इन दोनों पर विभागीय कार्रवाई शुरू करेंगे। मालूम हो कि ये गैंग सीबीएसई द्वारा आयोजित जूनियर क्लर्क की भर्ती परीक्षा में पकड़ा गया था।
मनीष ने बुंदलखंड में फैला रखा था जाल
गिरोह का सरगना मनीष मिश्रा मूलरूप से सिद्धार्थनगर का रहने वाला था लेकिन वह वर्तमान में झांसी में रहता था। पूरा जाल उसने बुंदेलखड़ में फैलाया था। सोशल मीडिया के जरिये वह अभ्यर्थियों से संपर्क करता था। फिर उनसे मिलकर परीक्षा पास कराने की डील करता था।
जांच का दायरा बड़ा, गठित हो सकती है स्पेशल टीम
एफआईआर उप्र सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत दर्ज की गई है। इसलिए विवेचना राजपत्रित अधिकारी को सौंपी गई है। वर्तमान में केस के विवेचक एसीपी गाजीपुर अनिंद्य विक्रम सिंह हैं। चूंकि मामला प्रदेश के कई शहरों से जुड़ा है। सॉल्वर दिल्ली के भी हैं। इसलिए जांच का दायरा बड़ा है। इसमें स्पेशल टीम भी गठित हो सकती है।
