उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप में अमेठी के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी मनोज कुमार शुक्ला और हरदोई के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी हर्ष मवार को बर्खास्त कर दिया है। अमेठी में विभाग के ही प्रधान लिपिक ने ही शुक्ला पर जबरन वसूली के आरोप लगाए थे। वहीं, हरदोई के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी हर्ष मवार पर कार्मिकों के भुगतान में टेंडर प्रक्रिया का पालन न करके वित्तीय नियमों के विपरीत कोटेशन के माध्यम से कार्य कराने और खरीद नियमों की अवहेलना करने के भ्रष्टाचार के आरोप थे। उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की सहमति के बाद दोनों को बर्खास्त किया गया है।

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अमेठी के जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में प्रधान लिपिक गोकुल प्रसाद जायसवाल ने शिकायत की थी कि 26 दिसंबर 2024 को जिला समाज कल्याण अधिकारी मनोज कुमार शुक्ला ने अपने चैंबर में बुलाकर बलपूर्वक उनका मोबाइल छीनकर और डरा-धमकाकर एवं फोन पे का पासवर्ड प्राप्त कर अपनी पत्नी डॉ. अंजू शुक्ला के खाते में 40 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए। जातिगत द्वेष व अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया।

लिपिक के खाते से जबरन ट्रांसफर कराई राशि

प्रारंभिक जांच में मनोज कुमार शुक्ला पर आरोप की पुष्टि होने पर उन्हें निलंबित कर अमेठी से हटा दिया गया था। समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक सुनील कुमार विसेन को जांच अधिकारी बनाया गया। जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि प्रधान लिपिक के बैंक खाते से शुक्ला ने जबरन ऑनलाइन धनराशि अपनी पत्नी के खाते में ट्रांसफर की। बचाव में मनोज कुमार शुक्ला की ओर से कहा गया कि प्रधान लिपिक पर उधार लेने के बाद धनराशि वापस न किए जाने और कई अन्य कर्मचारियों के सामने धनराशि ट्रांसफर कराई गई, लेकिन आरोपित अधिकारी के इन आरोपों को जांच में निराधार पाया गया। इसी तरह से जांच में हरदोई के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी हर्ष मवार पर वित्तीय अनियमितता के सभी आरोप सही पाए गए। वे वर्तमान में मुख्यालय से संबद्ध चल रहे थे।



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