ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई में मौत के बाद यहां लोगों में अब अमेरिकी रिसर्चर कैथरीन (महिला) की यात्रा को लेकर तरह-तरह की चर्चा है। लोगों का कहना है कि अमेरिका ने पहले ही खामेनेई की वंशावली खंगाल ली थी।

अयातुल्ला अली खामेनेई के दादा अयातुल्ला अल-उज्मा सैयद रुहोल्ला मूसवी खोमेनी ईरान के पहले सर्वोच्च नेता थे। खोमेनी के बाद खामेनेई ईरान के दूसरे सर्वोच्च नेता बने। खामेनेई की मौत के बाद अब यह कहा जा रहा है कि अमेरिकी रिसर्चर शायद वह समझना चाहती थीं कि खामेनेई को नुकसान पहुंचने पर भारत में क्या असर होगा? यहां की आवाम ईरान के हुक्मरान के प्रति कितनी संजीदा है?

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15 अप्रैल 2025 को अमेरिकी रिसर्चर कैथरीन यहां जिले की सिरौलीगौसपुर तहसील के किंतूर गांव आईं थीं। कैथरीन के साथ केरल की एक यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर व फ्रीलांसर गायत्री त्यागी भी थी। उन्होंने इमाम खुमैनी के खानदान से जुड़े आदिल काजमी से मुलाकात कर और इमाम खुमैनी और हिंदुस्तान के रिश्तों की गहराई को समझने के लिए शोध कार्य करने की बात कही थी। इमाम खुमैनी और भारत के आध्यात्मिक संबंधों का अध्ययन किया था। लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह शोध वास्तव में इतना सरल था, या इसके पीछे कोई गहरा उद्देश्य था?

इस घटना ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के पीछे कोई गहरा कारण था। आदिल काजमी का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि अमेरिकी रिसर्चर की मंशा यहां आने की क्या रही होगी पर जो हुआ है वह निंदनीय औ दुखद है। 

वहीं किंतूर गांव की विरासत अब वैश्विक जिज्ञासा का केंद्र बन चुकी है। वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में इस गांव का सैय्यदबाड़ा अंतर्राष्ट्रीय मीडिया और शोधकर्ताओं के लिए एक आकर्षण का केंद्र बन गया है।



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