आगरा की एक पार्लर संचालिका ने पेट्रोल डालकर लखनऊ में सीएम आवास पर आत्मदाह करने की कोशिश की। समय रहते उसे पुलिस ने पकड़ लिया। शनिवार को महिला को पुलिस वाहन में बैठाने का वीडियो वायरल हुआ है। जिसमें वह ट्रांसयमुना थाने के पूर्व थानेदार और चार दरोगाओं पर मारपीट और छेड़छाड़ का आरोप लगा रही है।

ट्रांसयमुना थाना क्षेत्र की यह महिला पार्लर व बुटीक संचालन करती हैं। बताया कि 15 सितंबर 2024 को उनके घर में चोरी हुई थी। पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने बिना उनको बताए एफआर लगा दी। जब वह इस बारे में पूछने थाने गईं तो 21 अगस्त 2025 को बातचीत का वीडियो बनाने पर महिला पुलिसकर्मी से अभद्रता हुई। शांतिभंग की धाराओं में महिला को जेल भेजा गया था।

महिला ने बताया था कि तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक रोहित गुर्जर से एफआर के बारे में पूछने पर जानकारी नहीं दी। विवेचक राजकुमार गोस्वामी थाने में मौजूद थे। उन्होंने अभद्रता की। वह कुछ दिन पहले निलंबित हो चुके थे। पुलिसकर्मियों ने कमरा बंद कर उसे बेरहमी से पीटा था। बाद में पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने पुन: विवेचना के आदेश दिए थे।

विवेचना इंस्पेक्टर कोतवाली भानु प्रताप सिंह यादव को दी थी। विवाद की जांच एडीसीपी पूनम सिरोही ने की थी। उन्होंने जांच रिपोर्ट में किसी को दोषी नहीं माना था। शिकायत पर दोबारा जांच एडीसीपी क्राइम हिमांशु गौरव को दी गई थी। अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है।

नए वीडियो ने ताजा किया मामला

शनिवार को सामने आए नए वीडियो में महिला लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के पास दिख रही है। पुलिस उसे अपनी गाड़ी में बैठाकर ले जा रही है। इस दौरान वह तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक रोहित गुर्जर और चार दरोगाओं पर मारपीट और छेड़छाड़ का आरोप लगा रही है। कई बार शिकायत के बाद भी अब तक कोई सुनवाई नहीं होने का आरोप लगा रही है। पीड़ित महिला के परिजन का कहना है कि आगरा पुलिस से न्याय न मिलने के चलते महिला अवसाद में आ गई है। लखनऊ में आत्मदाह की कोशिश के बाद आगरा पुलिस की लखनऊ में चर्चा हो रही है।

वीडियो में महिला ने किए सवाल

महिला ने सवाल उठाए हैं कि महिला दरोगा से मारपीट के आरोप में उसका शांतिभंग की धाराओं में चालान किया गया मगर उन्हें पीटने वाले चारों दरोगाओं पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनके घर से हुई लाखों की चोरी का अब तक खुलासा नहीं हुआ। वह पीड़ित थी और अपनी परेशानी के बारे में बात करने थाने गई थी। वीडियो बनाना इतना बड़ा गुनाह था कि पुरुष दराेगाओं ने पीटा। थाने के कमरे में बंद कर प्रभारी निरीक्षक क्या करना चाहते थे। चार माह से ज्यादा समय बीतने के बाद भी प्रकरण की जांच पूरी नहीं हो पाई है।

 



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