इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) को किसी आपराधिक मामले को एक अदालत से दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने का अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकल पीठ ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत यह अधिकार केवल सत्र न्यायाधीश, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को ही प्राप्त है। इसलिए लखनऊ के सीजेएम द्वारा पारित ट्रांसफर आदेश को अदालत ने अवैध मानते हुए रद्द कर दिया।
यह मामला करीब 3.20 करोड़ रुपये के सोने के गहनों के गबन से जुड़ा है। आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी और फरवरी 2022 में निचली अदालत ने मुकदमे की सुनवाई शुरू की। आरोपियों ने पहले सत्र न्यायाधीश से केस ट्रांसफर की मांग की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने सीजेएम के पास आवेदन दिया, जिस पर मामला दूसरी अदालत में भेज दिया गया था।
