उत्तर प्रदेश के राजकीय महाविद्यालय ही नहीं राजकीय तकनीकी शिक्षण संस्थानों में भी सामान्य ब्रांच में छात्रों का टोटा है। प्रदेश में नए शुरू राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों में ही नहीं कई पुराने संस्थानों में भी कंप्यूटर साइंस छोड़कर सिविल, मैकेनिकल व इंलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में छात्रों की संख्या दहाई में है। जबकि शिक्षकों की संख्या पर्याप्त है।
छात्रों की घटती संख्या का बड़ा कारण ब्रांचों को आज की जरूरत के अनुरूप अपग्रेड न करना है। जिन ब्रांच में प्रवेश नहीं हो रहे हैं, उनको इमर्जिंग एरिया की ब्रांच में परिवर्तित नहीं किया जा रहा है। इस वजह से यहां तैनात शिक्षकों का सही प्रयोग भी नहीं हो पा रहा है।
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राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों में बीटेक में सिविल, केमिकल और मैकेनिकल कोर्स को अपग्रेड न करने से सर्वाधिक छात्रों का संकट इन्हीं ब्रांचों में है। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज प्रतापगढ़ में बीटेक में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्वीकृत 60 सीटों के सापेक्ष 7, सिविल इंजीनियरिंग में 60 के सापेक्ष 11, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 60 के सापेक्ष 13 प्रवेश हुए।
वहीं राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज गोंडा में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्वीकृत 60 सीटों के सापेक्ष 5, सिविल इंजीनियरिंग में 60 के सापेक्ष 6, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 60 के सापेक्ष 7 प्रवेश हुए हैं। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बस्ती में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में स्वीकृत 60 सीटों के सापेक्ष 22, सिविल इंजीनियरिंग में 60 के सापेक्ष 19, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 60 के सापेक्ष 12 प्रवेश हुए। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज आजमगढ़ में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्वीकृत 60 सीटों के सापेक्ष 25, सिविल इंजीनियरिंग में 60 के सापेक्ष 25 प्रवेश हुए।
पुराने संस्थान भी संकट से जूझ रहे: पुराने राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों में बीटेक में तो प्रवेश हो जा रहे हैं लेकिन एमटेक में काफी दिक्कत है। बीआईईटी झांसी में आधा दर्जन एमटेक कोर्स में या तो प्रवेश का खाता ही नहीं खुला या एक, दो, तीन छात्रों के प्रवेश हुए। एमबीए में 60 सीटों के सापेक्ष 7 प्रवेश हुए। केएनआईटी सुल्तानपुर भी इससे अछूता नहीं रहा। यहां पर भी अधिकतर एमटेक कोर्स में प्रवेश में छात्रों ने रुचि नहीं दिखाई। पार्ट टाइम एमटेक में भी प्रवेश नहीं हुए। आईईटी लखनऊ में भी पीजी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 18 सीटों के सापेक्ष 4, बायोटेक्नोलॉजी में 18 के सापेक्ष 7, इनवायरमेंटल इंजीनियरिंग में 18 के सापेक्ष 11 छात्रों ने प्रवेश लिया है।
