साथिया परामर्श केंद्र की काउंसलर रूबी बघेल का कहना है कि किशोर और युवा वर्ग की छात्राओं में कई नए परिवर्तन देखने को मिलते हैं। इस उम्र में उनमें लगाव की स्थिति अधिक होती है जिससे ब्रेकअप या नोकझोंक होने पर वह तनाव को बर्दाश्त नहीं कर पातीं। अच्छी बात है कि वह काउंसलिंग के जरिये तनाव से बाहर आना चाहती हैं। पिछले चार महीनों में रिश्तों से जुड़े मामलों में तकरीबन 30 से 35 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। इसमें रिलेशनशिप में ब्रेकअप, अविश्वास, झगड़े, उपेक्षा के केस अधिक हैं।

केस-1


बदलते व्यवहार से हुई परेशान

वजीरपुरा की रहने वाली 18 वर्षीय युवती ने बताया कि उसका रिश्ता पिछले कुछ महीनों से बिगड़ता जा रहा था। पार्टनर के बदलते व्यवहार और शक करने की आदत ने उसे मानसिक रूप से कमजोर कर दिया था। कई कोशिशों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं आ रहा था। इसके बाद किसी के बताने पर साथिया केंद्र पहुंची। काउंसलिंग के बाद उसने खुद को संभाला और बातचीत के जरिए रिश्ते को बेहतर दिशा देने की कोशिश की।

केस-2


गलतफहमी ने भरी रिश्ते में कड़वाहट

तेलीपाड़ा निवासी 19 वर्षीय युवती का कहना है कि सोशल मीडिया पर छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़े होने लगे। पार्टनर की चैट और पोस्ट को लेकर गलतफहमी ने रिश्ते को कड़वाहट से भर दिया। काउंसलिंग में उसे ज्यादा सोचना कम करने और भरोसे के साथ संवाद बढ़ाने की सलाह दी गई।

रिश्ते संभालने का कर रहीं प्रयास

परामर्श विशेषज्ञ डाॅ. पल्लवी वालिया का कहना है कि युवतियां अपनी भावनाओं को समझने और रिश्तों को संभालने के प्रयास के लिए जागरूक हैं। इस कारण वह समस्या बढ़ने का इंतजार नहीं करती बल्कि काउंसलिंग का सहारा लेने लगी हैं।

विशेषज्ञों की सलाह

1- रिश्ते में तनाव आते ही संवाद बढ़ाएं।

2- छोटी बातों को दिल पर न लें, गलतफहमी को तुरंत दूर करें।

3- जरूरत पड़ने पर पेशेवर काउंसलर की सलाह जरूर लें।

4- सोशल मीडिया को रिश्तों पर हावी न होने दें।

 



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