संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar

Updated Sun, 22 Mar 2026 05:33 PM IST

सिलेबस के नाम पर किताबें बदलने का अधिकार स्कूलों के पास नहीं है, अगर कोई स्कूल ऐसा करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा किसी भी बोर्ड की ओर से किसी भी विक्रेता को अधिकृत नहीं किया गया है। ऐसे में स्कूल अभिभावकों को किसी एक दुकान से किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। 

 


Book set rate Schools are pressuring students to buy expensive books from private publishers

बुक स्टोर पर अभिभावकों ने किया था प्रदर्शन।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी



विस्तार

नया शैक्षणिक सत्र मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए आर्थिक मार की पीड़ा देने वाला बन गया है। निजी स्कूलों की मनमानी और पब्लिशर्स के साथ उनके कथित गठजोड़ ने शिक्षा को एक मुनाफे वाला व्यापार बना दिया है। हालत यह है कि प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें सरकारी (एनसीईआरटी) किताबों की तुलना में 1900 गुना तक महंगी बेची जा रही हैं, जिससे अभिभावकों का बजट पूरी तरह चरमरा गया है।

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