पहले जेल में रंजिश, फिर जुआ लूटने पर एक ही के जिंदा बचने का एलान। राज चाैहान की हत्या का प्लान अरबाज खान उर्फ मंसूरी ने एक महीने पहले ही बना लिया था। पूरी तैयारी के साथ राज को गेस्ट हाउस में पार्टी के लिए बुलाया गया। साथियों ने ही मंसूरी को ऑल क्लियर का मैसेज भेजा और मंसूरी समेत 5 हमलावरों ने पैदल ही पहुंचकर राज पर पांच तमंचे से ताबड़तोड़ 18 गोलियां चलाकर उसकी हत्या कर दी।

पुलिस ने गेस्ट हाउस के सीसीटीवी फुटेज कब्जे में लिए थे। इसमें राज के साथी हमलावरों के आने के बाद भागते हुए बाहर निकलते नजर आ रहे हैं। मूलरूप से हाथरस के गांव बेदई निवासी राज चाैहान (22) की 23 जनवरी को एसएन स्टे गेस्ट हाउस में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पोस्टमार्टम में सात गोलियां लगने से मौत की पुष्टि हुई थी। हत्या में मुख्य रूप से खंदाैली के शाह नगर बंबा का अरबाज खान उर्फ मंसूरी, आशु तिवारी, विष्णु पंडित, आकाश प्रजापति और मोहित पंडित शामिल थे। अरबाज खान पुलिस की मुठभेड़ में मारा गया। आशु तिवारी और मोहित पंडित गिरफ्तार हुए।

 




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Jail Rivalry and Turf War Led to Raj Chauhan’s Murder Planned a Month in Advance

राज चौहान हत्याकांड
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


पुलिस ने दोनों से पूछताछ की। इसमें कई जानकारी हाथ लगी हैं। पुलिस ने बताया कि राज और मंसूरी एक साथ जेल में बंद थे। तब उनमें ठन गई थी। दोनों एक-दूसरे के दुश्मन बन गए थे। एक महीने पहले जेल से बाहर आने के बाद राज ने जुलूस निकाला। उसके जुलूस में 200 से अधिक युवा शामिल हुए थे। वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने युवकों को चिह्नित किया था। उनके खिलाफ कार्रवाई की थी।


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राज चौहान हत्याकांड
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


जेल से बाहर आने के बाद राज ने अपना दबदबा कायम करना शुरू कर दिया था। 14 जनवरी को उसने साथियों के साथ यमुना किनारा पर जुआ लूट लिया था। यह जुआ मंसूरी की शह पर चल रहा था। हथियारों के बल पर मारपीट भी की थी। तब से ही उसके खिलाफ साजिश की जाने लगी। मंसूरी बदमाश आलोक यादव का साथी था। राज क्षेत्र में उभरते हुए बदमाश के रूप में सामने आ रहा था। यह बात अन्य दबंगों को खटकने लगी थी।

 


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राज चौहान हत्याकांड
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


पुलिस की पूछताछ में पता चला कि राज चाैहान ने अपने गुट के युवकों से कहा था कि वह मंसूरी को जीने नहीं देगा। शहर छोड़ेगा या फिर अपनी जान से हाथ धो बैठेगा। यह बात मंसूरी को गुट के ही युवक ने बताई थी। तब से ही मंसूरी भी अन्य गुट के लोगों के साथ मिलकर उसकी हत्या की साजिश रच रहा था। राज की शराब पार्टी में दो लोग ऐसे थे जो मंसूरी से मिले हुए थे। उसमें से एक ने ही ऑल क्लियर मैसेज भेजा था। दो बदमाश एक बाइक पर आए थे, उन्होंने गेस्ट हाउस से 300 मीटर दूर बाइक खड़ी कर दी। मंसूरी सहित तीन ऑटो से पहुंचे थे। इसके बाद पांचों पैदल ही एक साथ गेस्ट हाउस में घुसे और वारदात की।

 


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– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


ऐसे बढ़ी थी रंजिश

मई 2024 में प्रिंस उर्फ काली यादव को दो गोलियां मारने के बाद राज चाैहान उसे बाइक पर लटकाकर ले गया था। वह क्षेत्र में दबदबा कायम करना चाहता था। इससे क्षेत्र के बदमाश आलोक यादव और राज यादव के बीच ठन गई थी। आलोक का समर्थन एक और हिस्ट्रीशीटर कर रहा था। दोनों के बीच क्षेत्र के हर गलत काम के लिए तनातनी होने लगी थी। पुलिस के अनुसार, राज ने अपने दादा की भी हत्या की थी। तब वो नाबालिग था। उसे बाल सुधार गृह में रखा गया था।




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