इरादों में जान और नीयत साफ हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। इसे सच कर दिखाया है 35 वर्षीय शीनू ने, जिन्होंने पत्रकारिता की कलम छोड़ पत्थरों को चुना। उन्हें तराशा और एक सफल एक्सपोर्टर के रूप में पहचान बनाई है।
इरादों में जान और नीयत साफ हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। इसे सच कर दिखाया है 35 वर्षीय शीनू ने, जिन्होंने पत्रकारिता की कलम छोड़ पत्थरों को चुना। उन्हें तराशा और एक सफल एक्सपोर्टर के रूप में पहचान बनाई है।
एक मुस्लिम परिवार की इस बेटी ने दस साल की कड़ी मेहनत से न केवल खुद को एक प्रमुख हस्तशिल्प निर्यातक के रूप में स्थापित किया, बल्कि 300 से अधिक महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें आत्मनिर्भर भी बना रही हैं। अमेरिका और चीन तक अपने कारोबार का विस्तार करने वाली शीनू की नजर अब ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, न्यूजीलैंड और यूरोपीय बाजारों पर है। उनकी फैक्ट्री में काम करने वाली महिलाएं आज अपने परिवारों का मजबूत आर्थिक आधार बन चुकी हैं।