पश्चिमी उत्तर प्रदेश एक व्यापक भू-आर्थिक परिवर्तन का संकेत बन चुका है। गाजियाबाद से जेवर तक बनती विकास की यह शृंखला उत्तर प्रदेश को पारंपरिक “लैंडलॉक्ड” राज्य की सीमाओं से बाहर निकालकर उसे भारत के उभरते ‘ग्लोबल गेटवे’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।  

गाजियाबाद की नई  पहचान बनेगा ‘इंटीग्रेटेड अर्बन हब’

गाजियाबाद में 2200 करोड़ रुपये की लागत से इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम और एरोसिटी प्रोजेक्ट विकसित हो रहा हैं। 417 एकड़ में तैयार हो रहा यह इंटीग्रेटेड अर्बन हब में खेल, व्यापार, पर्यटन और आधुनिक जीवनशैली का संगम देखने को मिलेगा। परियोजना के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम, कन्वेंशन सेंटर, रिटेल और बिजनेस हब, होटल और स्मार्ट रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स बनेंगे। 

एक्सप्रेसवे से फ्रेट कॉरिडोर तक

गाजियाबाद से जेवर तक प्रस्तावित नमो भारत आरआरटीएस कॉरिडोर इस नेटवर्क की धुरी है। यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे जैसे हाई-स्पीड मार्ग इस क्षेत्र को राष्ट्रीय राजधानी और देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों से जोड़ते हैं। दिल्ली-मेरठ के बीच देश के पहले रैपिड रेल प्रोजेक्ट ‘नमो भारत’ का भी संचालन हो रहा है। इसके साथ डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स टर्मिनल इस क्षेत्र को माल परिवहन और निर्यात का महत्वपूर्ण केंद्र बना रहे हैं।


जेवर एयरपोर्ट: वैश्विक कनेक्टिविटी का केंद्रबिंदु

लगभग 7200 एकड़ में विकसित हो रही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना  दिल्ली-एनसीआर के हवाई दबाव को कम करने में सहायक होगी। ये पश्चिमी यूपी को सीधे अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जोड़ेगा। इसके साथ विकसित हो रही एमआरओ सुविधा और बड़े पैमाने पर कार्गो हब, इस क्षेत्र को उत्पादन, वितरण और निर्यात का केंद्र बनेगी। 

पश्चिमी यूपी: अवसरों का उभरता केंद्र

जेवर और आसपास के क्षेत्रों में निवेश बढ़ा है, भूमि मूल्यों में वृद्धि हुई है और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। वहीं, गाजियाबाद में विकसित हो रहा अर्बन हब पर्यटन और सेवा क्षेत्र को गति देगा, जबकि मजबूत कनेक्टिविटी नेटवर्क उद्योगों और व्यापार को नई दिशा देने का मार्ग प्रशस्त करेगा।



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