ऑनलाइन कंपनियों से जुड़े डिलीवरी ब्वाय यानी गिग वर्करों की बढ़ती संख्या के बावजूद उन्हें अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं। इसे देखते हुए श्रम विभाग ने एक तरफ गिग वर्करों के पंजीकरण के लिए सख्ती की है, तो दूसरी तरफ बिना उनका पक्ष जाने कंपनियों के पक्ष में एकतरफा निर्णय देने की प्रक्रिया में भी बदलाव की व्यवस्था की है। विभाग का कहना है कि प्रदेश में केवल 10 फीसदी गिग वर्करों का ही पंजीकरण है। कंपनियां उनका फायदा उठा रही हैं।
प्रदेश में ऑनलाइन कंपनियों (एग्रीगेटर्स) से जुड़े करीब 15 लाख गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। इस भारी अंतर और श्रमिकों के शोषण की शिकायतों को देखते हुए श्रम विभाग ने अब पंजीकरण में सख्ती के साथ-साथ कंपनियों की जवाबदेही तय करने का निर्णय लिया है।
कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए
श्रमिक प्रतिनिधियों और ट्रेड यूनियनों ने कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रमुख मुद्दा कंपनियों द्वारा बिना श्रमिक का पक्ष सुने उनकी आईडी ब्लॉक करने का है। प्रमुख सचिव (श्रम एवं सेवायोजन) डॉ. शन्मुगा सुन्दरम ने इस पर स्पष्ट निर्देश दिए कि एग्रीगेटर कंपनियां अब एकतरफा निर्णय नहीं ले सकेंगी। विभाग ऐसी व्यवस्था करने जा रहा है जिसमें श्रमिक को अपना पक्ष रखने का अनिवार्य अवसर मिलेगा।
दस्तावेजों के अनुसार, भारत में गिग इकोनॉमी 17 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रही है और विश्व की कुल अर्थव्यवस्था में इनकी भागीदारी लगभग दस खरब डॉलर है। यूपी में करीब 200 प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं, जिनमें जोमैटो, स्विगी, उबर, ओला, ब्लिंकिट, जेप्टो और रेपीडो प्रमुख हैं। प्रमुख सचिव ने कहा कि नवीन श्रम संहिताओं में पहली बार गिग वर्कर को कानूनी रूप से परिभाषित किया गया है। अब उन्हें सामाजिक सुरक्षा देना कंपनियों की कानूनी जिम्मेदारी होगी।
विवादों के निपटारे के लिए विभाग ने एक ”त्रिपक्षीय व्यवस्था” (सरकार, कंपनी और श्रमिक) का प्रस्ताव दिया है। उप श्रमायुक्त पंकज सिंह राणा ने बताया कि कार्यशाला के दूसरे सत्र में एग्रीगेटर्स को उनकी कल्याणकारी योजनाओं जैसे हेल्थ इंश्योरेंस, बच्चों के लिए स्कॉलरशिप और रेस्ट पॉइंट्स के बारे में जानकारी देने को कहा गया। साथ ही, ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण में आ रही देरी की समस्या को भी शासन के समक्ष रखा गया है।
श्रम संगठनों की मांग
- वर्करों की सुरक्षा के लिए ग्राहकों का भी उचित प्रमाणीकरण (केवाईसी) होना चाहिए
- दुर्घटना और स्वास्थ्य बीमा का अनिवार्य प्रावधान किया जाए
- श्रमिकों को सेवामित्र पोर्टल की 28 सेवाओं और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना का लाभ लेने का सुझाव
- एग्रीगेटर ऐप्स पर ट्रैफिक नियमों के पालन और डिलीवरी के लिए अनुचित दबाव न डालने पर जोर
