यूपी कोऑपरेटिव बैंक की गोंडा शाखा में 21 करोड़ 47 लाख 78 हजार रुपये के बड़े घोटाले का राजफाश हुआ है। स्पेशल ऑडिट और आंतरिक जांच की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर सोमवार को 16 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें तीन तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन पाल, अजय कुमार और सुशील कुमार, कैशियर पवन कुमार के अलावा खाताधारक शामिल हैं।
स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार ऋण वितरण से पहले न तो आवेदकों की पात्रता की जांच की गई और न ही आय प्रमाणपत्र, जमानत मूल्यांकन रिपोर्ट और आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन हुआ। कई मामलों में फर्जी और कूटरचित अभिलेखों के आधार पर ऋण स्वीकृत कर दिए गए। शाखा स्तर पर बैंक नीति और आरबीआई के दिशानिर्देशों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
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2021 से जून 2025 के बीच का मामला, शाखा प्रबंधकों ने अपने घर वालों के खातों में भेजी राशि
जांच में यह भी उजागर हुआ कि तत्कालीन शाखा प्रबंधकों ने स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों के खातों का भी प्रयोग किया। ऋण वितरण के नाम पर निकाली गई धनराशि को माता, पत्नी और पुत्र के खातों में भेजा गया। यह गड़बड़ी दिसंबर 2021 से जून 2025 के बीच विभिन्न चरणों में हुईं। इस अवधि में अलग-अलग समय पर तैनात रहे शाखा प्रबंधकों व कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में पाई गई है।