आगरा के थाना न्यू आगरा क्षेत्र के एक आरोपी ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के सहारे खुद को कागज पर मुर्दा साबित करा दिया। कोर्ट से अपने खिलाफ चल रहे वाद को बंद (उपशमित) करवा लिया। थाना हरीपर्वत पुलिस ने भी 2013 में आरोपी के पड़ोसियों से हस्ताक्षर कराकर मृत होने की आख्या दे दी। आरोपी 12 साल बाद वादी को अपनी उसी स्कूटर (स्कूटी) को सड़क पर दौड़ाते दिख गया, जिसे उसने मौत के बाद अपने नाम पंजीकृत कराया था।

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तत्कालीन विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में मूल परिवाद (संख्या-242/1999) राजकुमार वर्मा बनाम विद्या देवी आदि के बीच कूटरचित दस्तावेज के आरोप में मुकदमा लंबित चल रहा था। सुनवाई के दौरान आरोपी विद्या देवी, चुन्नी लाल गोयल और रोशन लाल वर्मा की मौत हो गई। कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी।

 



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