आगरा पुलिस की मुठभेड़ में मारा गया हत्यारोपी सुनील नशे का आदी था। दिन में हर समय शराब पीता था। उसने बच्ची को अपने कमरे में बहाने से बुलाया था। चाकू से दो बार गला रेतने के बाद लाश को ड्रम में डाल दिया था। उसने बच्ची की चीखों की आवाज तक बाहर नहीं आने दी थी। हालांकि ड्रम को ठिकाने लगाने से पहले पुलिस आ गई थी। इस वजह से वो अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सका।
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बच्ची के घर जुटी भीड़
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास के मुताबिक मोहल्ले के लोगों और अन्य तरीके से जानकारी मिली है कि सुनील दिन में 12 में से 8 घंटे नशे में रहता था। उसकी हरकत की वजह से पत्नी कई साल पहले छोड़कर चली गई थी। माता-पिता ने भी उसे रखने से इनकार कर दिया था। 6 महीने पहले ही सुनील कारखाना संचालक के मकान में रहने लगा। वह आए दिन झगड़ा करता था। उसकी हरकतों के बारे में बस्ती के लोगों को भी जानकारी थी। इस वजह से कोई भी उसे अपने पास नहीं बुलाता था।
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मुठभेड़ के बाद लोगों से बात करती पुलिस।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वह बच्चों को टॉफी और बिस्किट का लालच देकर अपने पास बुलाता था। मकान मालिक के घर में बच्चों से नजदीकियां बढ़ा ली थीं। इसके बाद वह बहाने से बच्चियों को गलत तरीके से छूता था। हालांकि लोग उसकी हरकत पर शक नहीं कर पाए। घटना वाले दिन भी वह नशे में था। हत्या के बाद लाश को आटे के ड्रम में डाल दिया। वह ड्रम को आटा लेकर आने के बहाने निकाल कर ले जाता और ठिकाने लगा देता, मगर बच्ची के लापता होने पर पुलिस के आने के कारण सफल नहीं हो सका।
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मुठभेड़ के बाद क्षेत्र में लोगों से पुलिस अधिकारियों ने बात की।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उसने घर लौटने के लिए रात का इंतजार किया मगर रात भर पुलिस जांच करती रही। बुधवार को भी मोहल्ले में आकर ड्रम को ले जाने की तैयारी कर रहा था लेकिन तभी मोहल्ले वालों ने यूपी 112 पर कॉल कर दिया और घरों की तलाशी की मांग की। यह सुनकर सुनील भाग निकला था। वहां से वह फतेहाबाद रोड पर चला गया। पुलिस ने 50 से अधिक घरों को खंगाला तो लाश बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने बस, रेलवे स्टेशन, मेट्रो के काम करने वाली जगह, शराब के ठेके, फुटपाथ सहित नगर निगम के बड़े पाइपों को भी चेक किया मगर उसके बारे में जानकारी नहीं मिल सकी।
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Agra Encounter
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बाद में पता चला कि वह ताजगंज के गांव गुटिल स्थित एक मंदिर पर बुधवार रात को पहुंचा था। यहां पर उसने भंडारा खाया। रात भर मंदिर के पास ही रुका। उसे पता था कि अगर वह वापस मोहल्ले में जाएगा तो पकड़ा जाएगा। बृहस्पतिवार को भी वह आसपास ही घूमता रहा। मजदूर बनकर मंदिर में जो भी लोग आए उनसे दान लेकर खाना खा लिया। शुक्रवार को पुलिस को उसके बारे में जानकारी मिली थी मगर पुलिस के पहुंचने से पहले ही वहां से भाग गया। रात में उसे बमरौली कटारा क्षेत्र में घेर लिया गया। मगर उसने पुलिस पर फायरिंग की, इसमें जवाबी कार्रवाई में ढेर हो गया।