गाजियाबाद के साहिबाबाद में फ्लैट नंबर 907 का पूजा घर अब सिर्फ एक कमरा नहीं रहा, बल्कि तीन बहनों के टूटते मन और अकेलेपन की खामोश की गवाही बन गया है। तीनों किशोरियों ने जिस खिड़की से छलांग लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त की, उस कमरे की दीवारें उनके अंतर्मन में चल रहे संघर्ष को बयां करती हैं। 

दीवारों पर बने क्रॉस के निशान ऐसे हैं, मानो किसी ने बार-बार खुद को समझाने या संभालने की कोशिश की हो और हर बार असफल होकर उन्हें मिटा दिया हो।




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Ghaziabad Triple Sister suicide Case Flats Pooja Ghar Room Reveal Pain Mystery Know Details in Hindi

फ्लैट में फैली तस्वीरें
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


फर्श पर तीनों किशोरियों के बचपन की तस्वीरें बिछी मिलीं

इसी पूजा कक्ष की फर्श पर तीनों किशोरियों के बचपन की तस्वीरें बिछी मिलीं। मासूम मुस्कान, पिता के साथ बिताए पल और परिवार के साथ खिंची यादगार तस्वीरें मानो जिंदगी के उन पन्नों को आखिरी बार देख लेने की चाह हो। 


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भारत सिटी सोसायटी के फ्लैट में कमरे की दीवार पर किशोरी ने लिखी लाइन
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


दीवारों पर लिखे मिले स्लोगन

दीवारों पर लिखे स्लोगन मेक मी ए ब्रोकन हार्ट, आई एम अलोन उन भावनाओं को उजागर करते हैं, जिन्हें शायद वे किसी से कह नहीं सकीं। भारत सिटी सोसायटी के बी-1 टॉवर स्थित चेतन कुमार के फ्लैट में दाखिल होते ही दाहिने हाथ पर उनकी दूसरी पत्नी हिना का कमरा है।


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घटनास्थल पर जांच करती पुलिस
– फोटो : पीटीआई


तीनों बहनों का पूजा कक्ष में बीतता था अधिकांश समय

सामने पहली पत्नी सुजाता का कमरा और उससे सटा हुआ पूजा कक्ष। यहां परिवार के सभी सदस्यों का आना-जाना था, लेकिन तीनों बहनों का अधिकांश समय यहीं बीतता था। यही कमरा उनके सुकून की जगह था और विदाई का रास्ता भी बना।


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घटनास्थल पर जांच करती पुलिस
– फोटो : पीटीआई


हादसे के बाद जब पुलिस की फील्ड यूनिट ने पूजा कक्ष का दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, तो जलती हुई आर्टिफिशियल एलईडी लाइटें और बिखरी तस्वीरें देख कुछ पल के लिए ठिठक गई। यहीं एक पॉकेट डायरी भी मिली, जिसमें दर्ज शब्द किशोरियों के भीतर के अकेलेपन और मानसिक उथल-पुथल की ओर इशारा करते हैं।




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