प्रयागराज मेला क्षेत्र स्थित रामानंद मार्ग के तपस्वी नगर, पांटून पुल नंबर एक व संगम नोज के पास सहित करीब दस से अधिक शिविरों में शुक्रवार को वसंत पंचमी से बड़ी संख्या में साधु-संतों ने पंचधूनी (पंचाग्नि तपन) साधना आरंभ कर दी। 

अयोध्या के महामंडलेश्वर संत श्रीराम संतोष दास ने बताया कि पंचधूनी साधना गंगा दशहरा तक चलेगी। शास्त्रों में 32 भगवत अपराधों का उल्लेख है, जिनसे बचना हर साधक और भक्त के लिए आवश्यक है। भगवान के शयन काल में परिक्रमा करना, विग्रह के सम्मुख पैर फैलाकर बैठना, ऊंचे आसन पर बैठकर भगवान की पूजा करना, भगवान के सामने ऊंचे स्वर में बोलना या चिल्लाना, विग्रह के सामने किसी को आशीर्वाद देना जैसे कृत्य भगवत अपराध की श्रेणी में आते हैं। 

महामंडलेश्वर गोपालदास जी महाराज के अनुसार पंचधूनी साधना का मुख्य उद्देश्य इंद्रियों पर नियंत्रण, आत्मिक शुद्धि और आत्मबोध की प्राप्ति है।

 



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