ताजमहल सुरों की महफिल से रात में रोशन होता था। ये बात पांच दशक पुरानी है। ताजमहल के संगमरमरी चबूतरे पर उर्स पर मुशायरा होता था।

उर्स
– फोटो : AI
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उर्स
– फोटो : AI
मुगल बादशाह शाहजहां के 371वें उर्स की तैयारियां शुरू हो गई हैं। वक्त के साथ उर्स का स्वरूप भी बदला है। एक दौर ऐसा था जब रात में मकबरे के संगमरमरी चबूतरे पर मीनारों के साए में सुरों की महफिल सजती थी। मुमताज और शाहजहां की कब्र के सामने रातभर कव्वालियां गूंजती थीं।